UGC NET December 2025 Results: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (UGC NET) दिसंबर 2025 सत्र के परिणाम घोषित कर दिए हैं। इस बार के परिणाम शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बने हुए हैं, क्योंकि पिछले चार सत्रों के रुझानों की तुलना में जूनियर रिसर्च फैलोशिप (JRF) और पीएचडी के लिए क्वालिफाई करने वाले उम्मीदवारों के प्रतिशत में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
पंजीकरण और उपस्थिति का गणित
इस सत्र में उम्मीदवारों का उत्साह काफी अधिक देखा गया, लेकिन परीक्षा की गंभीरता और प्रतिस्पर्धा भी उसी अनुपात में बढ़ी है:
- कुल पंजीकरण: 9,93,702 उम्मीदवार
- परीक्षा में शामिल हुए: 7,35,614 अभ्यर्थी
- कुल सफल उम्मीदवार: 1,76,879 (JRF, असिस्टेंट प्रोफेसर और पीएचडी के लिए)
यह परीक्षा 31 दिसंबर 2025 से 7 जनवरी 2026 के बीच देशभर के 283 शहरों के 663 केंद्रों पर कंप्यूटर-आधारित मोड (CBT) में आयोजित की गई थी।
लगातार घट रहा है JRF का प्रतिशत
नेट परीक्षा के सबसे प्रतिष्ठित पड़ाव ‘जेआरएफ’ के आंकड़े चिंताजनक रुझान दिखा रहे हैं। पिछले चार सत्रों के डेटा के अनुसार, जेआरएफ प्राप्त करने वाले छात्रों का प्रतिशत लगातार 1% से नीचे बना हुआ है।
| सत्र | JRF प्रतिशत (%) |
|---|---|
| दिसंबर 2024 | 0.79% |
| दिसंबर 2025 | 0.69% |
यह गिरावट दर्शाती है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शोध (Research) के लिए फैलोशिप प्राप्त करना अब और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
पीएचडी प्रवेश में भी आई कमी
जून 2024 से यूजीसी ने नेट परीक्षा के माध्यम से ही पीएचडी प्रवेश की व्यवस्था लागू की थी। हालांकि, दिसंबर 2025 के सत्र में पीएचडी के लिए पात्र होने वाले उम्मीदवारों का ग्राफ सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
* दिसंबर 2025 में पीएचडी पात्रता: 15.91% (पिछले चार सत्रों का न्यूनतम स्तर)
बदलता स्वरूप और बढ़ती चुनौतियां
पहले यह परीक्षा केवल जेआरएफ और असिस्टेंट प्रोफेसर की पात्रता के लिए होती थी, लेकिन अब इसमें पीएचडी प्रवेश को भी जोड़ दिया गया है। 85 विषयों में आयोजित होने वाली इस परीक्षा में सफल 1.76 लाख उम्मीदवारों के सामने अब देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों में जगह बनाने की चुनौती होगी। जानकारों का मानना है कि प्रश्नपत्रों के स्तर में बदलाव और बढ़ती संख्या के कारण कट-ऑफ और चयन प्रतिशत पर यह प्रभाव पड़ा है।
यूजीसी नेट दिसंबर 2025 के परिणाम बताते हैं कि नेट केवल एक पात्रता परीक्षा नहीं रह गई है, बल्कि यह शोध और अकादमिक क्षेत्र के लिए एक कड़े छननी तंत्र के रूप में उभर रही है।































