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Symbol of Dalit Politics: नीला रंग कैसे बन गया दलित राजनीति और आंदोलन की पहचान, रोचक है किस्सा और सफर

Symbol of Dalit Politics: नीला रंग कैसे बन गया दलित राजनीति और आंदोलन की पहचान, रोचक है किस्सा और सफर

Symbol of Dalit Politics: नीला रंग भारतीय दलित राजनीति और आंदोलन का एक प्रमुख प्रतीक बन गया है। यह रंग समानता, बंधुत्व और विशालता का प्रतिनिधित्व करता है, और इसकी जड़ें संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर (Dr. B. R. Ambedkar) के समय से जुड़ी हैं। 1942 में, डॉ. आंबेडकर ने शेड्यूल कास्ट फेडरेशन ऑफ इंडिया (Scheduled Caste Federation of India) नामक संगठन की स्थापना की। इसके झंडे का रंग नीला था, जिसमें सफेद अशोक चक्र भी था।

“नीला रंग” (Blue Color) और “दलित राजनीति का प्रतीक” (Symbol of Dalit Politics) ने समय के साथ एक व्यापक पहचान बना ली।

रिपब्लिकन पार्टी और नीले झंडे का सफर

डॉ. आंबेडकर द्वारा स्थापित संगठन को 1956 में भंग कर रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (Republican Party of India) की स्थापना की गई। इसका झंडा भी नीला रखा गया, जो डॉ. आंबेडकर के आदर्शों को दर्शाता था। इस झंडे ने दलित समाज में एकजुटता का संदेश फैलाया। बाद में, जब रामदास आठवले ने अपनी अलग रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) बनाई, तब भी उन्होंने नीले झंडे को अपने आंदोलन का प्रतीक बनाया।

नीला रंग और समानता का संदेश

नीला रंग, आकाश का प्रतीक है। जिस तरह आकाश सबको समान रूप से छांव देता है, उसी तरह यह रंग भी समानता और गैर-भेदभाव का संदेश देता है। दलित चिंतक कांचा इलैया का मानना है कि नीले रंग का चयन समानता और संघर्ष के प्रतीक के रूप में किया गया।

हालिया आंदोलनों में नीले रंग का उपयोग

2016 में, जब रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद देशव्यापी विरोध हुआ, तब नीला झंडा और नीले रंग के बैनर पूरे आंदोलन में छाए रहे। 2018 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से एससी-एसटी अत्याचार अधिनियम कमजोर हुआ, तो नीला झंडा फिर से विरोध का प्रमुख प्रतीक बना।

बसपा और आजाद समाज पार्टी का योगदान

1984 में कांशीराम द्वारा स्थापित बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) ने भी नीले झंडे को अपनी पहचान बनाया। आज भी बसपा का झंडा नीला है, जिसमें सफेद हाथी का चित्र है। चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी ने भी इसी परंपरा को अपनाया। उनके झंडे का रंग नीला है और उनके गले में नीला गमछा उनकी पहचान बन चुका है।

नीला रंग: संघर्ष और बदलाव का प्रतीक

नीला रंग दलित समाज की अस्मिता का प्रतीक है। यह संघर्ष, समानता और बंधुत्व का प्रतिनिधित्व करता है। डॉ. आंबेडकर द्वारा शुरू किया गया यह सफर आज भी दलित आंदोलन और राजनीति के हर पहलू में जीवित है।


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