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सूरत: एक डांट ने छीन ली 23 साल के युवक की ज़िंदगी, समाज के लिए बड़ा सवाल

सूरत: एक डांट ने छीन ली 23 साल के युवक की ज़िंदगी, समाज के लिए बड़ा सवाल
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सूरत: आज के दौर में तनाव (Stress) सिर्फ बड़ों की समस्या नहीं रह गई है। ये सच्चाई अब और भी भयावह होती जा रही है कि छोटी उम्र के बच्चे और युवा भी मानसिक दबाव से जूझ रहे हैं। छोटी-छोटी बातों पर टूट जाना, गुस्से में बड़े फैसले ले लेना और आत्महत्या जैसे कदम उठाना हमारे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। सवाल ये नहीं है कि गलती किसकी थी, सवाल ये है कि हमारी परवरिश, हमारा व्यवहार और हमारा संवाद आखिर कहां कमजोर पड़ रहा है।

ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला गुजरात के सूरत शहर से सामने आया है, जिसने हर माता-पिता और समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

सूरत की घटना ने सबको झकझोर दिया

सूरत के रामपुरा इलाके में स्थित हमद पार्क आवासीय सोसायटी में 23 वर्षीय युवक मोहम्मद दानिश मोतियानी ने आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि काम में हाथ न बंटाने और ज्यादा समय बाहर बिताने को लेकर पिता ने उसे डांट दिया था। यही डांट दानिश के दिल पर इतनी गहरी चोट बन गई कि वह खुद को संभाल नहीं पाया।

शुक्रवार रात (26 दिसंबर) पिता से हुई कहासुनी के बाद दानिश ने अपने घर की चौथी मंजिल से छलांग लगा दी। गिरने से उसके सिर में गंभीर चोटें आईं। परिवार और पड़ोसियों ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मेहनती था दानिश, फिर भी टूट गया

पुलिस के अनुसार, मोहम्मद दानिश अपने पिता की हीरे की पॉलिशिंग की दुकान में मदद करता था और कभी-कभी ऑटो रिक्शा भी चलाता था। वह पूरी तरह बेरोजगार नहीं था, लेकिन शायद उसके भीतर चल रहा मानसिक संघर्ष किसी को दिखाई नहीं दिया।

लालगेट पुलिस थाने ने इस मामले को आकस्मिक मृत्यु के रूप में दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के पीछे कोई और कारण तो नहीं था।

एक डांट, एक पल और हमेशा का सन्नाटा

इस घटना के बाद पूरा परिवार सदमे में है। पड़ोसी भी विश्वास नहीं कर पा रहे कि इतना छोटा सा विवाद इतना बड़ा अंजाम ले लेगा। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या आज के युवा भावनात्मक रूप से बेहद अकेले हो गए हैं? क्या वे अपनी बात खुलकर कह पाने में असमर्थ हो रहे हैं?

समाज और परिवार के लिए बड़ा संदेश

यह खबर सिर्फ एक आत्महत्या की नहीं है, बल्कि एक चेतावनी है। बच्चों और युवाओं पर पढ़ाई, करियर, जिम्मेदारियों और अपेक्षाओं का बोझ लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में माता-पिता और परिवार का संवेदनशील होना बेहद जरूरी है। डांट-फटकार की जगह संवाद, समझ और सहारे की जरूरत है।

विशेषज्ञ भी मानते हैं कि किसी भी पारिवारिक तनाव या मानसिक परेशानी की स्थिति में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से सलाह लेना जरूरी है। समय पर की गई एक बातचीत, एक समझदारी भरा कदम किसी की जान बचा सकता है।

इस खबर को ज्यादा से ज्यादा साझा करें, ताकि समाज में बच्चों और युवाओं में बढ़ते तनाव को लेकर जागरूकता फैले और हम सब मिलकर ऐसा माहौल बना सकें, जहां कोई भी खुद को अकेला और कमजोर महसूस न करे।

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