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Anil Ambani ED case: अनिल अंबानी पर ‘दोहरा’ कानूनी प्रहार, CBI की छापेमारी और ED की 9 घंटे लंबी पूछताछ

Anil Ambani ED case: अनिल अंबानी पर 'दोहरा' कानूनी प्रहार, CBI की छापेमारी और ED की 9 घंटे लंबी पूछताछ
Anil Ambani ED case: अनिल अंबानी पर 'दोहरा' कानूनी प्रहार, CBI की छापेमारी और ED की 9 घंटे लंबी पूछताछ

Anil Ambani ED case: रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के प्रमोटर और पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गुरुवार को देश की दो सबसे बड़ी जांच एजेंसियों—सीबीआई (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED)—ने अंबानी के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी। जहां एक ओर सीबीआई ने उनके ठिकानों पर छापेमारी की, वहीं दूसरी ओर ईडी ने उन्हें घंटों तक सवालों के घेरे में रखा।

CBI की बड़ी कार्रवाई: घर और दफ्तर में तलाशी
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने गुरुवार को अनिल अंबानी के आवास और कार्यालय परिसरों की सघन तलाशी ली। यह कार्रवाई 24 फरवरी को दर्ज की गई एक नई प्राथमिकी (FIR) के आधार पर की गई है।

  • बरामदगी: तलाशी के दौरान लोन ट्रांजैक्शन और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
  • मामला: यह कार्रवाई बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर आधारित है। आरोप है कि 2013 से 2017 के बीच रिलायंस कम्युनिकेशंस ने बैंक के साथ धोखाधड़ी की, जिससे बैंक को ₹2,220 करोड़ से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ।

ED का मैराथन इंटरोगेशन: 9 घंटे की पूछताछ
एक तरफ सीबीआई दस्तावेजों को खंगाल रही थी, तो दूसरी तरफ 66 वर्षीय अनिल अंबानी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर में पेश होना पड़ा।

  • पूछताछ का दौर: यह दूसरे दौर की पूछताछ थी, जो सुबह करीब 10:30 बजे शुरू हुई और रात 8:20 बजे तक चली।
  • फोकस: ईडी की जांच मुख्य रूप से फंड्स के डायवर्जन (पैसों को दूसरे खातों में भेजने) और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के संभावित उल्लंघनों पर केंद्रित है।

मामले का घटनाक्रम और मुख्य बिंदु

विवरणजानकारी
मुख्य आरोपीअनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम)
शिकायतकर्ताबैंक ऑफ़ बड़ौदा
धोखाधड़ी की अवधिवर्ष 2013 से 2017
कुल नुकसान₹2,220 करोड़ से अधिक
जांच एजेंसियांसीबीआई (छापेमारी), ईडी (पूछताछ)

क्या है ‘आरकॉम’ संकट की जड़?
रिलायंस कम्युनिकेशंस कभी भारत की शीर्ष टेलीकॉम कंपनियों में शुमार थी, लेकिन भारी कर्ज और बाजार में प्रतिस्पर्धा के चलते कंपनी दिवालियापन (Insolvency) की प्रक्रिया में चली गई। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या बैंकों से लिए गए लोन का इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए किया गया जिसके लिए वह लिया गया था, या उन पैसों को शेल कंपनियों के जरिए कहीं और स्थानांतरित कर दिया गया।

अंबानी के घर से बरामद दस्तावेजों और ईडी की पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर आने वाले दिनों में और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल, यह मामला भारतीय बैंकिंग प्रणाली में ‘बैड लोंस’ और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

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