भारत को नक्सलवाद के दंश से पूरी तरह मुक्त करने के संकल्प की सिद्धि का दिन ऐतिहासिक रहा। 31 मार्च की अंतिम समय सीमा (डेडलाइन) समाप्त होने के साथ ही, महाराष्ट्र के गड़चिरोली में छत्तीसगढ़ सीमा पर सक्रिय 9 कट्टर नक्सलियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया। इस समर्पण ने न केवल नक्सलियों के मनोबल को तोड़ा है, बल्कि सुरक्षाबलों को हथियारों का एक बड़ा जखीरा भी सौंप दिया है।
1. आत्मसमर्पण में महिला शक्ति का ‘मोहभंग’
गड़चिरोली पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने वाले इन 9 नक्सलियों में सबसे चौंकाने वाली बात 6 महिलाओं की मौजूदगी है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि नक्सली विचारधारा के भीतर अब महिलाओं का भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है।
* इनाम की राशि: आत्मसमर्पण करने वाले इन सभी नक्सलियों पर संयुक्त रूप से 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
* सक्रियता: ये सभी नक्सली लंबे समय से गड़चिरोली और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में हिंसक वारदातों में शामिल रहे थे।
2. हथियारों का जखीरा: पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी
समर्पण के तुरंत बाद नक्सलियों से हुई पूछताछ ने पुलिस को एक और बड़ी सफलता दिलाई। नक्सलियों द्वारा दी गई सटीक जानकारी के आधार पर पुलिस ने छत्तीसगढ़ सीमा से सटे घने जंगलों में छापेमारी की।
* बरामदगी: इस ऑपरेशन में भारी मात्रा में आधुनिक हथियार, विस्फोटक (IED) और गोला-बारूद बरामद किया गया है।
* प्रभाव: हथियारों का यह जखीरा हाथ लगने से सीमावर्ती इलाकों में नक्सलियों की हमला करने की क्षमता लगभग शून्य हो गई है।
3. अब भी रडार पर ‘अंतिम 6’ नक्सली
गड़चिरोली के पुलिस अधीक्षक नीलोत्पल ने स्पष्ट किया कि अभियान अभी रुका नहीं है। हालांकि 31 मार्च की समय सीमा बीत चुकी है, लेकिन सुरक्षा घेरा अब भी कड़ा है।
* मौजूदा स्थिति: पुलिस के अनुसार, गड़चिरोली-छत्तीसगढ़ सीमा पर अब केवल 6 नक्सली शेष रह गए हैं।
* पहचान: इन 6 नक्सलियों में से 1 गड़चिरोली का स्थानीय निवासी है, जबकि 5 अन्य छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं।
* अल्टीमेटम: पुलिस ने इन बचे हुए नक्सलियों को भी जल्द से जल्द आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी है, अन्यथा कठोर सैन्य कार्रवाई तय है।
4. मिशन ‘नक्सलमुक्त भारत’: एक नजर में
मुख्य बिंदु विवरण
डेडलाइन 31 मार्च 2026
समर्पण करने वाले 09 नक्सली (06 महिलाएं, 03 पुरुष)
इनाम राशि 30 लाख
बरामदगी भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक
बाकी बचे नक्सली केवल 06
5. विकास की ओर बढ़ता बस्तर और गड़चिरोली
31 मार्च की यह सफलता केवल एक सैन्य जीत नहीं है, बल्कि यह उस विश्वास की जीत है जिसे सरकार ने ‘विकास और सुरक्षा’ के समन्वय से पैदा किया है। गड़चिरोली जैसे जिलों में सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों के पहुंचने से नक्सलियों का आधार खत्म हो गया है।
9 नक्सलियों का यह समर्पण इस बात का प्रमाण है कि बंदूक की संस्कृति अब अंतिम सांसें ले रही है और ‘लाल आतंक’ का अंत अब महज कुछ ही कदमों की दूरी पर है।
पुलिस अधीक्षक का संदेश: हमारा उद्देश्य रक्तपात नहीं, बल्कि शांति है। जो 6 नक्सली बचे हैं, उनके पास अब भी मुख्यधारा में लौटने का मौका है, अन्यथा कानून अपना काम करेगा।
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