खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल अब इतने घने हो चुके हैं कि वैश्विक महाशक्ति अमेरिका के राष्ट्रपति कूटनीतिक मर्यादाओं को ताक पर रख चुके हैं। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की घेराबंदी के बाद फंसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब खुले तौर पर अपशब्दों और विनाश की धमकियों पर उतर आए हैं। यह न केवल दो देशों का तनाव है, बल्कि दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्ग की सुरक्षा का सवाल बन गया है।
1. ईस्टर संडे पर अमर्यादित प्रहार: ट्रम्प का ‘डिजिटल’ आक्रोश
पूरी दुनिया जब ईस्टर का त्योहार मना रही थी, तब राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर ईरान के खिलाफ अभद्र और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल कर सबको चौंका दिया।
* अशोभनीय भाषा: ट्रम्प ने न केवल ईरान के नेतृत्व को नीचा दिखाया, बल्कि ऐसी भाषा का प्रयोग किया जो किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति के इतिहास में पहली बार देखी गई।
* अंतिम चेतावनी: उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि यदि मंगलवार तक ईरान ने होर्मुज का रास्ता नहीं खोला, तो अमेरिका ‘जबरदस्त कहर’ बरपाएगा।
2. ‘टारगेट’ पर ईरान का बुनियादी ढांचा
ट्रम्प की धमकी केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने संभावित लक्ष्यों की रूपरेखा भी खींच दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अमेरिकी हमले में:
* ईरान के महत्वपूर्ण पावर प्लांट्स (बिजली घर) को निशाना बनाया जाएगा।
* देश के कनेक्टिविटी की रीढ़ माने जाने वाले पुलों (Bridges) को जमींदोज कर दिया जाएगा।
यह स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त करने की तैयारी में है।
3. ट्रम्प के बदलते सुर: क्या यह ‘माइंड गेम’ है?
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ जहाँ ट्रम्प सोशल मीडिया पर आग उगल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ एक टीवी इंटरव्यू में उनके सुर अचानक बदले हुए नजर आए।
* डील की संभावना: ट्रम्प ने कहा कि सोमवार को ईरान के साथ एक ‘बड़ी डील’ संभव है।
* भ्रम की रणनीति: विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प की यह ‘कभी सख्त-कभी नरम’ (Hot and Cold) रणनीति ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की एक कोशिश है, ताकि बिना युद्ध के ही होर्मुज को खुलवाया जा सके।
4. पहले राष्ट्रपति जिन्होंने मर्यादा तोड़ी
अमेरिकी इतिहास में यह पहली बार है जब ओवल ऑफिस में बैठा कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से और धार्मिक त्योहारों के अवसर पर ऐसी भाषा का उपयोग कर रहा है। इससे पहले किसी भी राष्ट्रपति ने शत्रु देश के खिलाफ भी इस स्तर की व्यक्तिगत टिप्पणी या अपशब्दों का प्रयोग नहीं किया था।
दुनिया की सांसें अटकीं
मंगलवार की डेडलाइन अब पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। यदि ईरान होर्मुज से अपनी पकड़ नहीं ढीली करता है और ट्रम्प अपनी धमकियों पर अमल करते हैं, तो यह तीसरे विश्व युद्ध की आहट भी हो सकती है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें सोमवार को होने वाली संभावित ‘डील’ पर टिकी हैं, जो इस तबाही को टालने का आखिरी रास्ता हो सकती है।
जब कूटनीति की भाषा खत्म होती है, तब या तो युद्ध होता है या फिर गालियों का शोर… फिलहाल अमेरिका दोनों ही मोर्चों पर खड़ा है।”































