बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक अध्याय का अंत और एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। पिछले कई दशकों से बिहार की सत्ता के केंद्र बिंदु रहे नीतीश कुमार। अब राज्य की सक्रिय राजनीति से विदा लेकर देश की संसद के ऊपरी सदन यानी राज्यसभा का रुख कर रहे हैं। उनके इस फैसले के साथ ही सबसे बड़ा सवाल उनके उत्तराधिकारी को लेकर था, जिस पर अब विराम लगता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेतृत्व ने बिहार की कमान मौजूदा उपमुख्यमंत्री और प्रखर नेता सम्राट चौधरी को सौंपने का अंतिम निर्णय ले लिया है।
नीतीश का ‘विदाई’ शेड्यूल: 10 अप्रैल को शपथ, 11 को इस्तीफा
बिहार की राजनीति में बदलाव की पटकथा तैयार हो चुकी है। घटनाक्रम कुछ इस प्रकार रहने वाला है:
10 अप्रैल: नीतीश कुमार दिल्ली में राज्यसभा सदस्य के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे।
11 अप्रैल: शपथ लेने के अगले ही दिन नीतीश कुमार पटना लौटेंगे और राजभवन जाकर राज्यपाल को मुख्यमंत्री पद का अपना इस्तीफा सौंपेंगे।
नई सरकार का गठन: इस्तीफे के तुरंत बाद भाजपा विधायक दल की औपचारिक बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से नया नेता चुना जाएगा।
क्यों चुने गए सम्राट चौधरी? भाजपा का बड़ा दांव
सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद के लिए चुनना भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसके पीछे कई अहम कारण हैं:
1. ओबीसी वोट बैंक पर पकड़: सम्राट चौधरी बिहार के प्रभावशाली लव-कुश (कोइरी-कुर्मी) समीकरण में ‘कोइरी’ समाज का नेतृत्व करते हैं। नीतीश के जाने के बाद इस वोट बैंक को साधे रखने के लिए वे सबसे उपयुक्त चेहरा हैं।
2. आक्रामक नेतृत्व: पिछले कुछ वर्षों में सम्राट चौधरी ने राजद और विपक्षी गठबंधन के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाया है, जिससे भाजपा कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ है।
3. संगठनात्मक अनुभव: प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री के रूप में काम करते हुए उन्होंने अपनी प्रशासनिक और राजनीतिक सूझबूझ का लोहा मनवाया है।नीतीश कुमार का नया सफर: चाणक्य अब केंद्र की भूमिका में
नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना बिहार की राजनीति के लिए एक ‘युगांतकारी’ घटना है। करीब दो दशकों तक बिहार के मुख्यमंत्री रहने के बाद अब वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय होंगे। माना जा रहा है कि केंद्र में एनडीए सरकार उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी या मंत्रिपद सौंप सकती है, जहां उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव का लाभ उठाया जा सके।
बिहार की सियासत पर प्रभाव
सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने से बिहार की राजनीति के समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे।
भाजपा का पूर्ण वर्चस्व
पहली बार भाजपा अपने दम पर बिहार में मुख्यमंत्री का चेहरा देगी, जिससे राज्य में पार्टी का आधार और मजबूत होने की संभावना है।
विपक्ष के लिए चुनौती: सम्राट चौधरी का आक्रामक अंदाज तेजस्वी यादव और महागठबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करेगा।
राजतिलक की तैयारी
बिहार में अब ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति खत्म हो चुकी है। पटना के गलियारों में अब बस सम्राट चौधरी के राजतिलक की चर्चा है। 11 अप्रैल को जब नीतीश कुमार इस्तीफा देंगे, तो वह केवल एक पद का त्याग नहीं होगा, बल्कि बिहार की सत्ता के उस ‘नीतीश मॉडल’ का अंत होगा जिसने सालों तक प्रदेश की दिशा तय की। अब देखना यह है कि सम्राटके नेतृत्व में बिहार विकास और राजनीति के किन नए सोपानों को छूता है।

























