IMF की चेतावनी: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक ने एक संयुक्त बयान जारी कर चेतावनी दी है कि इस युद्ध के कारण ईंधन और उर्वरक की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं। इससे वैश्विक महंगाई बढ़ने और आम लोगों की जिंदगी पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था को तीसरा बड़ा झटका
विशेषज्ञों के अनुसार, ये संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए तीसरा बड़ा झटका साबित हो सकता है। इससे पहले दुनिया कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभावों से जूझ चुकी है। अब मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने आर्थिक अस्थिरता को और गहरा कर दिया है।
वॉशिंगटन में हुई अहम बैठक
IMF और विश्व बैंक की स्प्रिंग मीटिंग्स के दौरान इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। इस वार्षिक बैठक में दुनिया भर के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंकों के प्रमुख वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर विचार करते हैं। इस बार प्रमुख चिंता मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष और उससे उत्पन्न ऊर्जा संकट रहा।
ईंधन और उर्वरक की कीमतों में तेज उछाल
संघर्ष के कारण तेल, गैस और उर्वरकों की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। मार्च 2026 में यूरिया की कीमतों में करीब 46 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। इससे कृषि लागत बढ़ने और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। खेतों से लेकर आम लोगों की थाली तक इसका असर महसूस किया जा सकता है।
ऊर्जा आपूर्ति में बाधा और शिपिंग पर असर
मिडिल ईस्ट के अहम समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट पर शिपिंग गतिविधियों में रुकावट आने लगी है। ये मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। आपूर्ति बाधित होने से ऊर्जा संकट और गहराने की आशंका है, जिसका असर कई वर्षों तक बना रह सकता है।
रोजगार और पर्यटन पर भी असर
संयुक्त बयान में ये भी कहा गया है कि युद्ध के कारण कई क्षेत्रों में लोगों को विस्थापित होना पड़ा है। इससे रोजगार के अवसर कम हुए हैं और पर्यटन उद्योग को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इन क्षेत्रों में सुधार आने में समय लग सकता है।
उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर ज्यादा दबाव
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस संकट का सबसे ज्यादा असर विकासशील और कम आय वाले देशों पर पड़ेगा। इन देशों के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 4.9 प्रतिशत कर दिया गया है, जो खराब स्थिति में 6.7 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। वहीं विश्व बैंक ने विकासशील देशों की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 3.65 प्रतिशत कर दिया है।
आगे क्या?
IMF, विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने संकेत दिया है कि वे प्रभावित देशों को नीतिगत सलाह और जरूरत पड़ने पर वित्तीय सहायता देने के लिए मिलकर काम करेंगे। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए जल्द राहत मिलने की संभावना कम नजर आ रही है।
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि ये वैश्विक आर्थिक संकट का रूप लेता जा रहा है। बढ़ती महंगाई, महंगे ईंधन और खाद की कीमतों के चलते आने वाले समय में आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए ये समय सतर्क रहने और ठोस रणनीति अपनाने का है।
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