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मैसूर प्रशासन का नया जुगाड़! अब खुले में पेशाब करने वालों को होना पड़ेगा शर्मिंदा

मैसूर

मैसूर: सार्वजनिक स्थानों पर खुले में पेशाब की समस्या से निपटने के लिए कर्नाटक के मैसूर शहर में प्रशासन ने एक अनोखी पहल शुरू की है। मैसूर सिटी कॉर्पोरेशन ने शहर के सेंट्रल बस स्टैंड के पास ऐसी चमकदार दीवार लगाई है, जिसमें लोग खुद को साफ देख सकते हैं। इस नई तकनीक का मकसद लोगों को खुले में पेशाब करने से रोकना और शहर को स्वच्छ बनाए रखना है।

सोशल मीडिया पर इस अनोखी “मिरर वॉल” का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे एक क्रिएटिव और स्मार्ट समाधान बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे लेकर मजेदार प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं।

80 मीटर लंबी चमकदार दीवार लगाई गई

मैसूर सिटी कॉर्पोरेशन ने ग्रामीण बस स्टैंड के सामने करीब 80 मीटर लंबी दीवार पर स्टेनलेस स्टील की चमकदार शीट्स लगाई हैं। ये शीट्स बिल्कुल शीशे जैसी दिखाई देती हैं और सामने खड़े व्यक्ति की परछाई साफ दिखाई देती है।

प्रशासन का मानना है कि जब लोग खुद को और आसपास मौजूद लोगों को शीशे में देखेंगे, तो वे खुले में पेशाब करने से हिचकेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शहर में स्वच्छता बनाए रखना और सार्वजनिक जगहों पर बदबू की समस्या को कम करना है।

रात में अपने आप जलती हैं LED लाइट्स

इस खास दीवार के आसपास LED लाइट्स भी लगाई गई हैं। शाम होते ही ये लाइट्स स्ट्रीट लाइट्स के साथ अपने आप जल जाती हैं, जिससे पूरी दीवार और अधिक चमकदार दिखाई देती है। इससे रात के समय भी लोग वहां रुकने या गंदगी फैलाने से बचेंगे।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

जैसे ही इस अनोखी दीवार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, लोगों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कुछ लोगों ने इसे शानदार और व्यवहारिक समाधान बताया, जबकि कुछ ने कहा कि असली जरूरत लोगों में “सिविक सेंस” विकसित करने की है।

एक यूजर ने लिखा कि शहरों को सिर्फ सुंदर बनाने से काम नहीं चलेगा, लोगों की सोच बदलना भी जरूरी है। वहीं दूसरे यूजर ने मजाक में कहा कि “अगर यहां कैमरा और स्क्रीन भी लगा दी जाए तो लोग और ज्यादा डरेंगे।”

खुले में पेशाब की समस्या से जूझते शहर

भारत के कई शहरों में सार्वजनिक जगहों पर खुले में पेशाब एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इससे न सिर्फ गंदगी और बदबू फैलती है, बल्कि महिलाओं और राहगीरों को भी असुविधा होती है। कई नगर निगम इस समस्या को रोकने के लिए जुर्माना, जागरूकता अभियान और सार्वजनिक शौचालय जैसी योजनाएं चला रहे हैं।

मैसूर प्रशासन की यह पहल इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इसमें तकनीक और मनोविज्ञान दोनों का इस्तेमाल किया गया है।

लोगों की मानसिकता बदलना सबसे जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ नियम या जुर्माना लगाने से समस्या खत्म नहीं होगी। लोगों में सार्वजनिक स्वच्छता और नागरिक जिम्मेदारी को लेकर जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।

मैसूर की ये “मिरर वॉल” फिलहाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है और कई लोग इसे दूसरे शहरों में भी लागू करने की मांग कर रहे हैं।

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