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डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ रुपया, एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंची भारतीय मुद्रा; जानिए इसकी बड़ी वजह

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भारतीय रुपये ने सप्ताह की शुरुआत मजबूती के साथ की है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 31 पैसे की बढ़त के साथ 95.12 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। ये 8 जुलाई के बाद रुपये का सबसे मजबूत स्तर माना जा रहा है। लगातार बढ़ती मजबूती के बीच बाजार की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर टिकी हुई है, जिसके फैसलों की घोषणा 5 अगस्त को की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, डॉलर इंडेक्स की कमजोरी, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और देश के बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार ने रुपये को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

शुरुआती कारोबार में रुपये की मजबूत शुरुआत

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में सोमवार को रुपया 95.15 प्रति डॉलर पर खुला और कुछ ही समय बाद 95.12 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। ये पिछले कारोबारी सत्र के बंद भाव 95.43 प्रति डॉलर की तुलना में 31 पैसे की मजबूती दर्शाता है।

इससे पहले शुक्रवार को भी रुपया लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ था और 7 पैसे की बढ़त के साथ बंद हुआ था। लगातार कई दिनों की मजबूती से संकेत मिल रहे हैं कि विदेशी मुद्रा बाजार में फिलहाल भारतीय मुद्रा के प्रति सकारात्मक माहौल बना हुआ है।

रुपये को मजबूती क्यों मिल रही है?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय कई ऐसे वैश्विक और घरेलू कारक हैं जो रुपये के पक्ष में काम कर रहे हैं।

1. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होता है, तो आयात पर खर्च कम होता है और डॉलर की मांग घटती है। इससे रुपये को मजबूती मिलती है।

सोमवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 5 प्रतिशत गिरकर 83.66 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जिसका सकारात्मक असर भारतीय मुद्रा पर देखने को मिला।

2. डॉलर इंडेक्स में कमजोरी

अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) लगभग 0.17 प्रतिशत गिरकर 99.74 पर आ गया। डॉलर कमजोर होने पर अन्य मुद्राओं के मुकाबले रुपये सहित कई करेंसी को मजबूती मिलती है।

3. विदेशी निवेशकों की खरीदारी

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयर बाजार में फिर से निवेश बढ़ाया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को एफआईआई ने 277.48 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की।

जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में निवेश करते हैं, तो उन्हें डॉलर बेचकर रुपये खरीदने पड़ते हैं, जिससे भारतीय मुद्रा की मांग बढ़ती है।

4. विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी

देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार मजबूती भी रुपये के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार से निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और मुद्रा बाजार में स्थिरता बनी रहती है।

5. RBI का समर्थन

विदेशी मुद्रा कारोबारियों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक की सक्रिय निगरानी और आवश्यक हस्तक्षेप भी रुपये को अत्यधिक उतार-चढ़ाव से बचाने में मदद कर रहे हैं।

RBI की MPC बैठक पर टिकी बाजार की नजर

सोमवार से RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक शुरू हो गई है। इस बैठक में ब्याज दरों, महंगाई और आर्थिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। समिति के फैसलों की घोषणा 5 अगस्त को की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरबीआई संतुलित और बाजार-अनुकूल रुख अपनाता है, तो रुपये की मजबूती आगे भी बनी रह सकती है।

शेयर बाजार में भी दिखी तेजी

रुपये की मजबूती के साथ-साथ घरेलू शेयर बाजार में भी सकारात्मक माहौल देखने को मिला।

  • सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 470 अंक चढ़कर 78,564.70 के स्तर पर पहुंच गया।
  • निफ्टी भी लगभग 150 अंक की बढ़त के साथ 24,532.95 पर कारोबार करता दिखाई दिया।

बाद के कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांकों में और तेजी देखने को मिली।

आम लोगों पर क्या होगा असर?

रुपये की मजबूती का सीधा फायदा कई क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।

  • पेट्रोल और डीजल की लागत पर दबाव कम हो सकता है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित सामान अपेक्षाकृत सस्ते हो सकते हैं।
  • विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और विदेशी भुगतान करने वाले कारोबारियों को राहत मिल सकती है।
  • आयात करने वाली कंपनियों की लागत घट सकती है।
  • महंगाई पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है।

आगे क्या?

अब बाजार की नजर पूरी तरह RBI की MPC बैठक और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम पर रहेगी। यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, विदेशी निवेश जारी रहता है और डॉलर कमजोर बना रहता है, तो आने वाले दिनों में रुपये की स्थिति और मजबूत हो सकती है। वहीं वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का असर भी भारतीय मुद्रा की चाल तय करेगा।

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