महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू, जबरन धर्म परिवर्तन पर होगी 10 साल तक की सजा

धर्मांतरण
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मुंबई: महाराष्ट्र में जबरन, धोखाधड़ी, लालच या विवाह के बहाने कराए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने ‘महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’ को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद कानून का राजपत्र (गजट) अधिसूचना जारी की गई, जिसके साथ ही यह पूरे राज्य में प्रभावी हो गया।

इस कानून का उद्देश्य किसी व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक लगाना नहीं, बल्कि ऐसे मामलों पर कार्रवाई करना है जिनमें जबरदस्ती, धोखाधड़ी, प्रलोभन, दबाव या शादी का झांसा देकर धर्म परिवर्तन कराया जाता है। सरकार का कहना है कि कानून केवल अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए बनाया गया है।

किन मामलों में होगी कड़ी कार्रवाई?

नए कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति का धर्म परिवर्तन—

  • बलपूर्वक,
  • धोखाधड़ी से,
  • आर्थिक या अन्य प्रलोभन देकर,
  • मानसिक दबाव बनाकर,
  • या विवाह का झांसा देकर कराता है,

तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 7 से 10 वर्ष तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

संवेदनशील वर्गों के मामलों में और सख्त सजा

कानून में महिलाओं, नाबालिगों, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) तथा मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों के जबरन धर्मांतरण को गंभीर अपराध माना गया है। इन मामलों में सजा और आर्थिक दंड दोनों अधिक कठोर हो सकते हैं। बार-बार अपराध करने वालों के लिए भी सख्त दंड का प्रावधान रखा गया है।

स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वालों के लिए क्या नियम?

यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। कानून के अनुसार धर्म परिवर्तन से 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) को सूचना देना अनिवार्य होगा, ताकि प्रशासन यह सुनिश्चित कर सके कि धर्म परिवर्तन किसी दबाव, धोखे या लालच का परिणाम नहीं है।

सरकार ने क्या कहा?

राज्य सरकार का कहना है कि यह कानून किसी विशेष धर्म को निशाना बनाने के लिए नहीं है। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए अवैध और जबरन धर्मांतरण की घटनाओं पर रोक लगाना है।

विपक्ष ने जताई आपत्ति

कानून लागू होने के बाद विपक्ष के कुछ नेताओं और संगठनों ने इसका विरोध किया है। उनका कहना है कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। कुछ नेताओं ने इसे अदालत में चुनौती देने की भी घोषणा की है।

देश का 12वां राज्य बना महाराष्ट्र

इस कानून के लागू होने के साथ महाराष्ट्र उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है जहां धर्मांतरण विरोधी कानून पहले से प्रभावी हैं। सरकार का दावा है कि इससे जबरन और धोखाधड़ी के माध्यम से होने वाले धर्मांतरण के मामलों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

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