पुणे के मोशी स्थित कचरा डंपिंग यार्ड में हुए दर्दनाक हादसे के बाद आखिरकार पुलिस और प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। इस हादसे में 9 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद अब वेस्ट-टू-एनर्जी (Waste-to-Energy) प्रोजेक्ट का संचालन करने वाली कंपनी के प्रोजेक्ट हेड और सेफ्टी ऑफिसर के खिलाफ गैर इरादतन हत्या (Culpable Homicide) समेत गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही इस हादसे की बड़ी वजह हो सकती है।
कैसे हुआ था मोशी कचरा हादसा?
8 जुलाई को भारी बारिश के दौरान मोशी स्थित कचरा डंपिंग यार्ड में वर्षों से जमा ‘लेगेसी वेस्ट’ का विशाल ढेर अचानक खिसक गया। कचरे का ये पहाड़ सीधे वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना की प्रशासनिक इमारत पर आ गिरा। हादसे के समय इमारत के भीतर कई कर्मचारी मौजूद थे। कुछ लोग समय रहते बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन कई कर्मचारी मलबे और कचरे के नीचे दब गए।
एनडीआरएफ, दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन ने कई घंटों तक राहत एवं बचाव अभियान चलाया। लंबी मशक्कत के बाद कुल 9 लोगों के शव बरामद किए गए, जबकि कई घायलों का इलाज अस्पताल में कराया गया।
पुलिस ने किन लोगों पर दर्ज किया मामला?
जांच के बाद पुलिस ने वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट का संचालन करने वाली कंपनी के प्रोजेक्ट हेड और सेफ्टी ऑफिसर के खिलाफ गैर इरादतन हत्या सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोप है कि दोनों अधिकारी मानसून के दौरान संभावित खतरे से अवगत होने के बावजूद आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू करने में विफल रहे। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता, तो इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
हादसे के बाद ये सवाल भी उठ रहे हैं कि जिस इमारत पर कचरे का विशाल ढेर गिरा, वहां कर्मचारियों को काम करने की अनुमति कैसे दी गई। जांच में ये भी देखा जा रहा है कि क्या भारी बारिश के दौरान जोखिम का पहले से आकलन किया गया था और क्या कर्मचारियों को सुरक्षित स्थान पर भेजने की कोई व्यवस्था की गई थी। प्रशासन परियोजना के सुरक्षा प्रोटोकॉल, संरचनात्मक सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की भी जांच कर रहा है।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जांच में यदि कंपनी प्रबंधन, संबंधित अधिकारियों या अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। दूसरी ओर, पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (PCMC) ने भी पूरे मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी है और सुरक्षा नियमों के पालन की समीक्षा की जा रही है।
मोशी हादसे ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि औद्योगिक और कचरा प्रबंधन परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। अब पीड़ित परिवारों को उम्मीद है कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।
ये भी पढ़ें: मुंबई AC Local Train में 15 मिनट तक बंद रहा AC, घुटन से कई महिला यात्री बेहोश; रेलवे ने शुरू की जांच

























