Ketan Murder Case: पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं। शुरुआत में ट्रैकिंग के दौरान हुई दुर्घटना समझी जा रही ये घटना अब एक सुनियोजित हत्या की कहानी बनकर सामने आई है। पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों ने न केवल जांच एजेंसियों बल्कि आम लोगों को भी हैरान कर दिया है।
जांच के अनुसार, केतन अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने लंबे समय तक योजना बनाकर इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस को मिले कॉल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी सबूत इस मामले को और गंभीर बना रहे हैं।
6 महीने में 2004 कॉल, 238 घंटे की बातचीत
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि जनवरी से जून 2026 के बीच सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच कुल 2004 फोन कॉल हुईं। इन कॉल्स की कुल अवधि लगभग 238 घंटे बताई जा रही है।
जांच अधिकारियों का मानना है कि दोनों लगातार संपर्क में थे और इन्हीं बातचीतों के दौरान केतन को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई। कॉल रिकॉर्ड्स ने पुलिस को मामले की तह तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्यार के पीछे छिपी थी साजिश?
पुलिस के अनुसार, सिया और चेतन के बीच करीबी संबंध थे। वहीं दूसरी ओर सिया की सगाई केतन अग्रवाल से हो चुकी थी और दोनों की शादी की तैयारियां चल रही थीं।
जांच में सामने आया है कि सिया इस रिश्ते से खुश नहीं थी और चेतन के साथ अपने संबंध जारी रखना चाहती थी। इसी वजह से केतन को रास्ते से हटाने की साजिश रची गई।
हत्या की एक नहीं, कई बार हुई कोशिश
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, केतन की हत्या का प्रयास केवल एक बार नहीं किया गया था। जांच में संकेत मिले हैं कि सिया ने कई बार अलग-अलग योजनाएं बनाईं और केतन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।
अधिकारियों का मानना है कि अंतिम वारदात से पहले भी कुछ प्रयास किए गए थे, जिनमें केतन बाल-बाल बच गया था।
लोहागढ़ किले पर रची गई मौत की कहानी
जांच के दौरान सामने आया कि सिया ने केतन को ट्रैकिंग के बहाने पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किले पर चलने के लिए राजी किया था। एडवेंचर और ट्रैकिंग के शौकीन केतन ने इसे सामान्य आउटिंग समझा और उसके साथ जाने के लिए तैयार हो गया।
पुलिस के अनुसार, किले पर पहुंचने के बाद केतन को खतरनाक इलाके की ओर ले जाया गया। इसी दौरान उसे खाई की तरफ धक्का देने की कोशिश की गई। हालांकि उस समय केतन किसी तरह बच गया।
शक से बचने के लिए रची नई कहानी
जांच में ये भी सामने आया है कि घटना के दौरान सिया ने खुद पर शक न होने देने के लिए पूरी स्थिति को हादसे का रूप देने की कोशिश की। उसने केतन को ये विश्वास दिलाया कि जो कुछ हुआ वो एक दुर्घटना थी।
इसी वजह से केतन को उस समय किसी साजिश का अंदाजा नहीं हो पाया और मामला वहीं समाप्त हो गया। लेकिन बाद में हुई घटनाओं और पुलिस जांच ने पूरे मामले का सच सामने ला दिया।
तकनीकी सबूत बने सबसे बड़ा हथियार
इस हाई-प्रोफाइल केस में पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), लोकेशन डेटा, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों का सहारा लिया। इन्हीं सबूतों के आधार पर जांच टीम सिया और चेतन तक पहुंची।
जांच एजेंसियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक की मदद से कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने कथित दुर्घटना की कहानी को पूरी तरह बदल दिया।
परिवार के संदेह ने खोला मामला
केतन के परिवार ने शुरुआत से ही इस घटना को सामान्य हादसा मानने से इनकार कर दिया था। परिवार का कहना था कि केतन एक अनुभवी ट्रेकर था और ऐसी परिस्थितियों में उसका दुर्घटनाग्रस्त होना सामान्य नहीं लगता।
परिवार के लगातार सवाल उठाने और पुलिस पर दबाव बनाए रखने के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया, जिसके बाद एक के बाद एक कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए।
पूरे देश में चर्चा का विषय बना मामला
केतन अग्रवाल हत्याकांड अब केवल पुणे तक सीमित नहीं रहा है। रिश्तों में विश्वासघात, प्रेम संबंध, साजिश और हत्या के आरोपों ने इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।
पुलिस फिलहाल मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस कथित साजिश में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था।
पुणे का केतन अग्रवाल हत्याकांड आधुनिक समय के उन मामलों में शामिल हो गया है, जहां तकनीकी जांच और डिजिटल सबूतों ने सच को सामने लाने में अहम भूमिका निभाई। 2004 कॉल, 238 घंटे की बातचीत और लंबे समय तक चली कथित साजिश ने इस मामले को और भी सनसनीखेज बना दिया है। आने वाले दिनों में अदालत और पुलिस जांच के दौरान इस केस में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
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