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संकट की घड़ी में भारत-नेपाल साथ, जानें भारत ने कैसे की मदद

Nepal

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। इस मुश्किल घड़ी में भारत ने नेपाल की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत की ओर से लगातार राहत सामग्री भेजी जा रही है और मेडिकल व टनल-रेस्क्यू विशेषज्ञों की टीम भी नेपाल पहुंची है। भारत की इस मानवीय पहल की नेपाल में काफी ज्यादा सराहना हो रही है।

जानकारी हो कि, भारत ने अब तक तीन चरणों में कुल 57.5 टन मानवीय सहायता नेपाल भेजी है। तीसरी खेप में 10 टन राहत सामग्री के साथ 11 सदस्यीय टीम भेजी गई, जिसमें डॉक्टर, पैरामेडिक्स और टनल रेस्क्यू ऑपरेशन का आकलन करने वाली टीम शामिल है।

संकट की घड़ी में भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ

गौरतलब है कि, नेपाल में 26 अगस्त को आई भयावह बाढ़ के बाद कई इलाकों में सड़क, पुल और संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। भारत ने आपदा के शुरुआती घंटों में ही मानवीय सहायता भेजना शुरू कर दिया था।

पहली खेप में करीब 10 टन राहत सामग्री भेजी गई थी। इसके बाद 37.5 टन की दूसरी खेप और फिर 10 टन की तीसरी खेप नेपाल पहुंचाई गई। राहत सामग्री में अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, दवाइयां, भोजन सामग्री, जनरेटर, पानी साफ करने वाली गोलियां और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं।

11 सदस्यीय मेडिकल और टनल रेस्क्यू टीम भी पहुंची

भारत की तीसरी सहायता उड़ान केवल राहत सामग्री तक सीमित नहीं रही। इसमें 11 सदस्यीय मेडिकल, पैरामेडिकल और टनल-रेस्क्यू आकलन टीम भी नेपाल पहुंची।

ये टीम उन इलाकों में राहत और बचाव की जरूरतों का आकलन कर रही है, जहां लोगों के सुरंगों या दुर्गम स्थानों में फंसे होने की आशंका है। भारत ने जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त तकनीकी सहायता और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने की भी पेशकश की है।

नेपाली एक्सपर्ट ने कहा- “भारत सिर्फ पड़ोसी नहीं, परिवार है”

भारत की राहत पहल को लेकर नेपाल में सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। नेपाली वरिष्ठ पत्रकार और विदेश मामलों के जानकार परशुराम काफले ने सोशल मीडिया पर भारत-नेपाल संबंधों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया साझा की।

उन्होंने भारत को केवल पड़ोसी देश नहीं बल्कि परिवार का हिस्सा बताया और कहा कि जब परिवार संकट में होता है तो एक-दूसरे के लिए खड़ा होना स्वाभाविक है।

भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से सामाजिक, सांस्कृतिक और लोगों के स्तर पर मजबूत संबंध रहे हैं। ऐसे में प्राकृतिक आपदा के समय भारत की ओर से भेजी गई राहत सामग्री को नेपाल में मानवीय सहयोग के तौर पर देखा जा रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे भारतीय विमान के वीडियो

नेपाल में राहत सामग्री लेकर पहुंचे भारतीय वायुसेना के विमानों के वीडियो सोशल मीडिया पर भी शेयर किए जा रहे हैं। कई नेपाली यूजर्स भारत की मदद के लिए आभार व्यक्त कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर कुछ नेपाली नागरिकों ने भारत के साथ अपने रिश्तों को भाईचारे से जोड़ते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संकट के समय एक-दूसरे की मदद महत्वपूर्ण है।

नेपाल में भारी तबाही, राहत और बचाव अभियान जारी

जैसा कि हम सभी जानते हैं, कि नेपाल में आई बाढ़ के बाद हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। नए रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेपाल में मृतकों की संख्या 600 से ज्यादा हो चुकी है और हजारों लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ से सड़कें, पुल, बिजली और संचार ढांचा प्रभावित हुआ है, जिससे दूरदराज के इलाकों तक राहत पहुंचाना मुश्किल बना हुआ है।

आपदा के बाद नेपाल और तिब्बत सीमा क्षेत्र में नए जलस्रोत और झील बनने से भी अतिरिक्त बाढ़ का खतरा बना हुआ है। राहत और बचाव दल लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं।

भारत ने आगे भी सहायता जारी रखने का भरोसा दिया

जहां तक भारत की बात है, तो भारत ने साफतौर पर कहा है कि नेपाल की जरूरत के अनुसार आगे भी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल के साथ एकजुटता जताते हुए हरसंभव मानवीय सहायता देने की बात कही थी। भारत की ये पहल उसकी ‘Neighbourhood First’ नीति और आपदा के समय मानवीय सहयोग की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

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