मुंबई में पानी की संभावित कमी को देखते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने नागरिकों और विभिन्न संस्थानों से पानी का इस्तेमाल सावधानीपूर्वक करने की अपील की है। नगर निगम ने साफ किया है कि पीने के पानी की बर्बादी या गलत इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन ने हाउसिंग सोसायटियों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, निर्माण स्थलों, शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक सुविधाओं के संचालकों को पानी बचाने के निर्देश दिए हैं।
कम बारिश और मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण शहर को पानी उपलब्ध कराने वाले सात जलाशयों में पानी के भंडार को लेकर चिंता बढ़ी है। ऐसे में BMC का जोर उपलब्ध पानी को लंबे समय तक इस्तेमाल करने और गैर-जरूरी खपत कम करने पर है।
मुंबई में पानी की सप्लाई में 10% कटौती
नगर निगम के मुताबिक, पानी की संभावित कमी को देखते हुए 15 मई 2026 से मुंबई में पानी की आपूर्ति में 10 प्रतिशत कटौती लागू की गई है। इसके अलावा औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साथ स्पोर्ट्स क्लबों के लिए पानी की आपूर्ति में 20 प्रतिशत कटौती का प्रावधान बताया गया है।
प्रशासन के सामने मौजूदा जल भंडार का इस्तेमाल इस तरह करने की चुनौती है, जिससे भविष्य में भी शहर की पेयजल जरूरतों को पूरा किया जा सके। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार के जल संसाधन विभाग के निर्देशों के अनुसार 31 अगस्त 2027 तक की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजना बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
BMC ने नागरिकों से क्या अपील की?
नगर निगम ने लोगों से रोजमर्रा की आदतों में बदलाव कर पानी बचाने की अपील की है। इसके लिए कुछ जरूरी निर्देश दिए गए हैं:
- जरूरत नहीं होने पर नल खुला न छोड़ें।
- घर, सोसायटी और परिसर में पानी की लीकेज होने पर तुरंत मरम्मत कराएं।
- गाड़ी धोने और परिसर की सफाई जैसे कामों में पीने के पानी का इस्तेमाल करने से बचें।
- जहां संभव हो, गैर-पीने योग्य कामों के लिए कुएं, बोरवेल या उपचारित पानी का इस्तेमाल करें।
- हाउसिंग सोसायटियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में पानी की खपत पर निगरानी रखें।
BMC का कहना है कि सामूहिक प्रयासों से पानी की बर्बादी कम की जा सकती है और उपलब्ध जल भंडार का बेहतर प्रबंधन संभव है।
निर्माण स्थलों के लिए भी जारी हुए निर्देश
निर्माण कार्यों में पानी की खपत को नियंत्रित करने के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं। निर्माण स्थलों पर पीने के पानी के बजाय सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी या बोरवेल के पानी का इस्तेमाल करने को कहा गया है।
इसी तरह, सड़कों की धुलाई, वाहनों की सफाई, बगीचों में सिंचाई और इमारतों के परिसरों की सफाई जैसे कामों में भी वैकल्पिक जल स्रोतों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।
इन उपायों का उद्देश्य पीने के लिए उपलब्ध पानी को गैर-जरूरी कार्यों में खर्च होने से बचाना है।
स्विमिंग पूल में पीने के पानी के इस्तेमाल पर रोक
पानी की संभावित कमी को देखते हुए स्विमिंग पूल से संबंधित पाबंदियां दोबारा लागू किए जाने की जानकारी दी गई है। नगर निगम के निर्देशों के अनुसार, स्विमिंग पूल में पीने के पानी का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
सार्वजनिक शौचालयों और रेस्ट रूम का प्रबंधन करने वाली संस्थाओं को भी उपलब्ध वैकल्पिक जल स्रोतों का अधिकतम इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है। प्रशासन चाहता है कि जहां पीने के पानी के बिना काम चल सकता है, वहां अन्य स्रोतों को अपनाया जाए।
पानी की लीकेज रोकने के लिए विशेष टीमें
पानी की पाइपलाइनों में लीकेज के कारण होने वाली बर्बादी को रोकने के लिए BMC के हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग विभाग ने विशेष टीमें बनाई हैं। इन टीमों को तय समयसीमा के भीतर लीकेज की समस्याओं को ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं।
पाइपलाइन से पानी का रिसाव लंबे समय तक जारी रहने पर बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद हो सकता है। इसलिए समय पर मरम्मत और नियमित निगरानी को जल संरक्षण की अहम कड़ी माना जा रहा है।
नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की चेतावनी
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि पीने के पानी की सप्लाई का अनुचित इस्तेमाल करने वाले लोगों या संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। यह निर्देश आवासीय परिसरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य संबंधित संस्थानों पर भी लागू किए गए हैं।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के निर्देशों का पालन करें और पानी की बर्बादी रोकने में सहयोग दें।
मुंबईकरों के लिए क्यों जरूरी है पानी बचाना?
मुंबई जैसे बड़े शहर में करोड़ों लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए जलाशयों में पर्याप्त पानी होना जरूरी है। कम बारिश की स्थिति में उपलब्ध जल भंडार का सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करना और गैर-जरूरी खपत कम करना महत्वपूर्ण हो जाता है।
मुंबई में पानी की संभावित कमी को देखते हुए BMC ने जल संरक्षण के उपायों को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया है। नागरिकों से लेकर निर्माण कंपनियों और व्यावसायिक संस्थानों तक सभी को पानी का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करने की जरूरत है। प्रशासन की अपील है कि छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर पानी की बर्बादी रोकें और शहर के जल भंडार को बचाने में योगदान दें।
ये भी पढ़ें: 14 साल की कानूनी लड़ाई के बाद BMW मालिक को राहत, इंश्योरेंस कंपनी देगी ₹70.75 लाख का मुआवजा























