देश के बड़े शहरों में मकानों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। मुंबई, पुणे, दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में मध्यम वर्ग के लिए बिना लोन के घर खरीदना लगभग असंभव हो गया है। ऐसे में होम लोन (Home Loan) लाखों परिवारों के लिए घर का सपना पूरा करने का एक महत्वपूर्ण साधन बन गया है। लेकिन सवाल ये है कि क्या होम लोन वास्तव में फायदेमंद है या फिर ये आम आदमी के लिए लंबे समय तक आर्थिक बोझ साबित हो सकता है?
घर की कीमत से कहीं ज्यादा चुकानी पड़ती है रकम
अधिकांश लोग 20 से 30 साल की अवधि के लिए होम लोन (Home Loan) लेते हैं। ऐसे में बैंक को चुकाया जाने वाला कुल ब्याज कई बार मूल रकम के बराबर या उससे भी अधिक हो जाता है।
उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यक्ति 50 लाख रुपये का होम लोन 25 साल के लिए लेता है, तो उसे ब्याज सहित कुल भुगतान 90 लाख से 1 करोड़ रुपये तक करना पड़ सकता है। यानी घर की वास्तविक कीमत से कहीं अधिक राशि बैंक को देनी पड़ती है।
EMI बन सकती है सबसे बड़ी चुनौती
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यक्ति की मासिक EMI उसकी कुल आय के 35 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। लेकिन घर खरीदने की जल्दबाजी में कई लोग अपनी आय का 50 प्रतिशत तक EMI में खर्च कर देते हैं।
ऐसी स्थिति में परिवार के अन्य खर्चों जैसे बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, निवेश और आपातकालीन जरूरतों के लिए पर्याप्त धन नहीं बच पाता। यही कारण है कि कई परिवारों को बाद में आर्थिक तनाव का सामना करना पड़ता है।
नौकरी जाने या आय घटने का खतरा
होम लोन (Home Loan) लेने के समय अधिकांश लोग अपनी वर्तमान आय को आधार बनाकर योजना बनाते हैं। लेकिन नौकरी में अनिश्चितता, व्यापार में नुकसान या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भविष्य में वित्तीय स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं।
यदि लगातार कुछ महीनों तक EMI नहीं भरी जाती है, तो बैंक नोटिस जारी कर सकता है और गंभीर मामलों में संपत्ति पर कब्जा करने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है।
ब्याज दरों में बदलाव भी बढ़ाता है बोझ
भारत में अधिकांश होम लोन (Home Loan) फ्लोटिंग ब्याज दर पर आधारित होते हैं। जब रिजर्व बैंक की नीतियों के कारण ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो EMI या लोन की अवधि भी बढ़ सकती है। इससे पहले से बनाई गई वित्तीय योजना प्रभावित हो सकती है।
कब फायदेमंद साबित हो सकता है होम लोन?
होम लोन (Home Loan) तब फायदेमंद माना जाता है जब आपकी नौकरी और आय स्थिर हो। डाउन पेमेंट कम से कम 20 से 30 प्रतिशत हो। EMI आपकी आय के 35 प्रतिशत से कम हो। आपके पास 6 से 12 महीने का इमरजेंसी फंड मौजूद हो। घर वास्तविक जरूरत के लिए खरीदा जा रहा हो, न कि केवल दिखावे के लिए।
घर खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
- केवल बैंक जितना लोन देने को तैयार है, उतना लोन लेना जरूरी नहीं है।
- EMI के साथ मेंटेनेंस, प्रॉपर्टी टैक्स और अन्य खर्चों को भी जोड़कर बजट बनाएं।
- कम अवधि का लोन चुनने पर कुल ब्याज कम देना पड़ता है।
- अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों और शर्तों की तुलना अवश्य करें।
- घर खरीदने के बाद भी बचत और निवेश जारी रखें।
होम लोन (Home Loan) आम आदमी के लिए घर का सपना पूरा करने का सबसे प्रभावी माध्यम है, लेकिन बिना उचित वित्तीय योजना के लिया गया लोन भविष्य में भारी बोझ बन सकता है। घर खरीदने का निर्णय भावनाओं के बजाय आय, बचत और भविष्य की वित्तीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर लेना चाहिए। सही योजना के साथ लिया गया होम लोन संपत्ति बनाने का साधन बन सकता है, जबकि गलत निर्णय आर्थिक तनाव का कारण बन सकता है।
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