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चमोली टनल हादसा: 150 मीटर दूर भूस्खलन से मचा हड़कंप, पानी में फंसे मजदूरों का रेस्क्यू जारी

चमोली टनल हादसा

चमोली टनल हादसा: उत्तराखंड के चमोली जिले में विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में भूस्खलन के बाद पानी और मलबा भर जाने से कई मजदूर अंदर फंस गए। हादसे के बाद एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुट गईं। मुश्किल हालात के बीच जवान नीले ड्रमों का सहारा लेकर टनल के अंदर आगे बढ़ रहे हैं।

टनल में घुसा पानी और मलबा

हादसा अलकनंदा नदी पर बन रही विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टेल रेस टनल में हुआ। मिली जानकारी के मुताबिक, जिस स्थान पर मजदूर काम कर रहे थे, उससे करीब 150 मीटर दूर भूस्खलन हुआ। इसके बाद पानी के साथ पत्थर और मलबा तेजी से टनल के भीतर पहुंच गया।

मलबे और पानी की चपेट में आने से कई मजदूर अंदर फंस गए। बताया जा रहा है कि टनल के एक हिस्से में पानी काफी ऊंचाई तक भर गया है, जिससे रेस्क्यू टीमों के सामने चुनौती बढ़ गई है।

नीले ड्रमों के सहारे आगे बढ़े जवान

राहत अभियान के दौरान एनडीआरएफ की टीमें रात करीब 10 बजे तीन वाहनों के साथ टनल के भीतर पहुंचीं। पानी की अधिक मात्रा को देखते हुए रेस्क्यू टीम अपने साथ नीले रंग के बड़े ड्रम भी लेकर गई।

जवान इन ड्रमों का सहारा लेकर पानी में आगे बढ़ते हुए फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। टनल के अंदर मलबा और पानी होने के कारण अभियान बेहद सावधानी से चलाया जा रहा है।

छह लोगों के रेस्क्यू की चुनौती

चमोली के एसपी सुरजीत सिंह पंवार के मुताबिक, टनल में पानी अधिक होने के कारण राहत कार्य में दिक्कत आ रही है। लापता छह लोगों को बाहर निकालने के लिए श्रीनगर गढ़वाल से राफ्ट भी मंगाई गई है।

रेस्क्यू टीमों की कोशिश है कि पानी के बीच सुरक्षित तरीके से आगे बढ़कर सभी फंसे लोगों तक पहुंचा जाए।

सभी संसाधन राहत कार्य में लगाए गए

परियोजना निदेशक शरद कुमार ने हादसे को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता टनल में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके लिए उपलब्ध सभी जरूरी संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी और घटना की विस्तृत जांच भी कराई जाएगी।

प्रशासन और प्रोजेक्ट टीम भी मौके पर

रेस्क्यू अभियान में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवानों के साथ परियोजना की मैनेजमेंट टीम भी जुटी हुई है। प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर स्थिति को नियंत्रित करने और फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास जारी है।

अधिकारियों के मुताबिक, सभी लोगों के सुरक्षित बाहर आने तक राहत और बचाव अभियान जारी रखा जाएगा।

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