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बॉडी फिट, लेकिन दिल कितना स्वस्थ? फिटनेस एक्सपर्ट मनोहर झा ने बताया सच

मनोहर झा

मुंबई: आज के दौर में फिट और स्वस्थ रहने के लिए जिम जाना, वेट ट्रेनिंग करना और नियमित एक्सरसाइज करना लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। लेकिन क्या सिर्फ मस्कुलर बॉडी और बाहर से फिट दिखना अच्छी सेहत की निशानी है? क्या जरूरत से ज्यादा वर्कआउट करना दिल की सेहत पर बुरा असर डाल सकता है? इन सवालों को समझना इसलिए जरूरी है, क्योंकि गलत तकनीक, जरूरत से ज्यादा शारीरिक मेहनत और शरीर के संकेतों को नजरअंदाज करना स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

अभिनेता नाना पाटेकर को लेकर सोशल मीडिया पर हार्ट अटैक से जुड़ी खबरें सामने आने का दावा किया गया है, लेकिन इन खबरों की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में किसी व्यक्ति विशेष की घटना से निष्कर्ष निकालने के बजाय ये समझना जरूरी है कि एक्सरसाइज करते समय दिल की सेहत का ध्यान कैसे रखा जाए।

इसी विषय पर हमारे संवाददाता हरीश तिवारी (Harish Tiwari) ने स्वास्थ्य एवं फिटनेस विशेषज्ञ मनोहर झा से बातचीत की। इस बातचीत में जिम करने के फायदे, जरूरत से ज्यादा वर्कआउट के जोखिम और सुरक्षित तरीके से फिट रहने के लिए जरूरी सावधानियों पर चर्चा की गई।

जिम करने से शरीर को क्या फायदे मिलते हैं?

फिटनेस विशेषज्ञ मनोहर झा के मुताबिक, सही तकनीक, नियमितता और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार एक्सरसाइज करने से शरीर को कई फायदे मिल सकते हैं। जिम में कार्डियो, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और अन्य शारीरिक गतिविधियों का संतुलित संयोजन फिटनेस बेहतर बनाने में मदद करता है।

1. दिल की सेहत बेहतर बनाने में मदद

नियमित शारीरिक गतिविधि हृदय और रक्त संचार प्रणाली के लिए फायदेमंद होती है। सही तरीके से की गई कार्डियो एक्सरसाइज से सहनशक्ति बढ़ सकती है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वर्कआउट की तीव्रता व्यक्ति की उम्र, फिटनेस और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार होनी चाहिए।

2. मांसपेशियां और हड्डियां होती हैं मजबूत

वेट ट्रेनिंग और स्ट्रेंथ एक्सरसाइज से मांसपेशियों की ताकत बढ़ती है। नियमित रूप से वजन उठाने वाले व्यायाम करने से हड्डियों के स्वास्थ्य को भी लाभ मिल सकता है। इससे रोजमर्रा के काम करने की क्षमता बेहतर होती है और उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों की कमजोरी को कम करने में मदद मिलती है।

3. वजन और शरीर की चर्बी नियंत्रित रखने में मदद

कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शरीर की ऊर्जा खपत बढ़ाती हैं। संतुलित खानपान के साथ नियमित व्यायाम करने से वजन नियंत्रित रखने और शरीर में अतिरिक्त चर्बी कम करने में मदद मिल सकती है। बेहतर मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए केवल जिम ही नहीं, बल्कि पूरे दिन सक्रिय रहना भी जरूरी है।

4. तनाव कम करने और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार

नियमित एक्सरसाइज से मूड बेहतर हो सकता है, तनाव कम करने में मदद मिल सकती है और नींद की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। इसलिए फिटनेस का संबंध सिर्फ शरीर की बनावट से नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य से भी है।

5. टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने में मदद

शारीरिक गतिविधि शरीर की इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को बेहतर बनाने में मदद करती है। इससे ब्लड शुगर नियंत्रित रखने और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने में फायदा हो सकता है। इसके लिए नियमित व्यायाम के साथ संतुलित आहार और स्वस्थ दिनचर्या भी महत्वपूर्ण हैं।

जिम करने के नुकसान और जोखिम क्या हैं?

मनोहर झा के अनुसार, जिम करना अपने आप में नुकसानदायक नहीं है। समस्या तब हो सकती है, जब कोई व्यक्ति बिना तैयारी के भारी वजन उठाता है, जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करता है या शरीर में दिखने वाले चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज करता है।

1. दिल पर बढ़ सकता है दबाव

अचानक बहुत भारी वजन उठाना या अपनी क्षमता से अधिक तीव्रता से वर्कआउट करना शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। जिन लोगों को पहले से हृदय संबंधी बीमारी है या जिनमें इसके जोखिम मौजूद हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे लोगों को व्यायाम की तीव्रता तय करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

यह समझना भी जरूरी है कि सामान्य और संतुलित एक्सरसाइज आमतौर पर हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती है। हार्ट अटैक का खतरा केवल जिम जाने से नहीं जुड़ा है; व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, पहले से मौजूद बीमारियां और अन्य जोखिम कारक भी महत्वपूर्ण होते हैं।

2. गलत तकनीक से मांसपेशियों और जोड़ों में चोट

बिना सही तकनीक के वजन उठाने, अचानक भारी एक्सरसाइज शुरू करने या जरूरत से ज्यादा अभ्यास करने से मांसपेशियों में खिंचाव, जोड़ों में चोट और पीठ की समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए शुरुआती लोगों को प्रशिक्षित फिटनेस ट्रेनर की देखरेख में सही तकनीक सीखनी चाहिए।

3. ओवरट्रेनिंग से बढ़ सकती है थकान

लगातार कठिन वर्कआउट करने और शरीर को पर्याप्त आराम नहीं देने से थकान, मांसपेशियों में लगातार दर्द, नींद की परेशानी और प्रदर्शन में गिरावट हो सकती है। शरीर को रिकवरी के लिए समय देना भी फिटनेस का अहम हिस्सा है।

4. स्टेरॉयड और सप्लीमेंट्स का गलत इस्तेमाल

जल्दी मसल्स बनाने या वजन बढ़ाने के लिए एनाबॉलिक स्टेरॉयड और बिना जांचे-परखे सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। कुछ स्टेरॉयड लिवर, किडनी और हृदय को नुकसान पहुंचा सकते हैं। किसी भी सप्लीमेंट का सेवन शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर या पंजीकृत आहार विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

जिम जाने वालों के लिए फिटनेस एक्सपर्ट मनोहर झा की जरूरी सलाह

जिम में बेहतर परिणाम पाने के साथ स्वास्थ्य को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। इसके लिए कुछ सावधानियों का पालन करना चाहिए।

  • हेल्थ चेकअप: यदि आपको पहले से कोई बीमारी है, लंबे समय से शारीरिक गतिविधि नहीं की है या हृदय संबंधी जोखिम हैं, तो कठिन वर्कआउट शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। हर व्यक्ति के लिए ECG या TMT जैसे टेस्ट जरूरी नहीं होते; इनकी आवश्यकता डॉक्टर तय करते हैं।
  • वार्म-अप जरूर करें: वर्कआउट से पहले हल्की गतिविधियों और शरीर को तैयार करने वाले अभ्यासों से शुरुआत करें। एक्सरसाइज के बाद धीरे-धीरे गतिविधि कम करें और जरूरत के अनुसार स्ट्रेचिंग करें।
  • धीरे-धीरे बढ़ाएं वर्कआउट: शुरुआत में हल्के वजन और कम तीव्रता से अभ्यास करें। शरीर की क्षमता और अनुभव के अनुसार धीरे-धीरे कठिनाई बढ़ाएं।
  • खानपान और नींद पर ध्यान दें: संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और नियमित नींद मांसपेशियों की रिकवरी तथा संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं। अधिकांश वयस्कों के लिए 7 से 9 घंटे की नींद उपयुक्त मानी जाती है।
  • दर्द और चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज न करें: एक्सरसाइज के दौरान सीने में दर्द या दबाव, असामान्य सांस फूलना, चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होने पर तुरंत व्यायाम रोक दें। यदि लक्षण गंभीर हों या बने रहें, तो तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

क्या बाहर से फिट दिखने वाला व्यक्ति अंदर से भी स्वस्थ होता है?

फिटनेस का आकलन केवल मसल्स, शरीर के आकार या वजन से नहीं किया जा सकता। किसी व्यक्ति का शरीर बाहर से मजबूत दिख सकता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि उसका ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और हृदय स्वास्थ्य भी सामान्य हैं।

इसीलिए फिटनेस के साथ मेटाबॉलिक हेल्थ पर ध्यान देना जरूरी है। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य जांच से शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।

जिम जाना और नियमित एक्सरसाइज करना स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन सही तकनीक, संतुलित वर्कआउट और पर्याप्त रिकवरी उतने ही जरूरी हैं। फिट रहने का मतलब सिर्फ मस्कुलर बॉडी बनाना नहीं, बल्कि दिल, मांसपेशियों, मेटाबॉलिज्म और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी है।

फिटनेस एक्सपर्ट मनोहर झा के साथ हुई बातचीत का मुख्य संदेश यही है कि अपनी शारीरिक क्षमता को समझें, जरूरत से ज्यादा मेहनत करने से बचें और स्वास्थ्य से जुड़े चेतावनी संकेतों को गंभीरता से लें।

यहां देखें पूरी इंटरव्यू:

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