KEM Hospital Sexual Abuse: मुंबई के मशहूर केईएम अस्पताल में एक चौंकाने वाली घटना ने पूरे शहर का ध्यान खींच लिया है। अस्पताल के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख पर एक गंभीर आरोप लगा है। एक सहायक प्रोफेसर की पत्नी, जो स्वयं एक डॉक्टर हैं, ने उनके और उनकी दो नाबालिग बेटियों के साथ छेड़छाड़ (Molestation) का आरोप लगाया है। यह मामला इतना संवेदनशील है कि इसमें भोईवाडा पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (BNS) और बच्चों के यौन शोषण से संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। इस घटना ने न केवल अस्पताल के माहौल को हिलाकर रख दिया, बल्कि समाज में ऐसी घटनाओं पर चर्चा को भी तेज कर दिया है।
यह घटना 2022 से 2025 के बीच की अवधि में हुई, जैसा कि शिकायत में बताया गया है। पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा कि आरोपी डॉक्टर ने उनके साथ कई बार अनुचित व्यवहार किया। उन्होंने बताया कि आरोपी ने उनके पीठ पर हाथ फेरा और उनके पति, जो केईएम अस्पताल में सहायक प्रोफेसर हैं, को जान से मारने की धमकी दी। इतना ही नहीं, शिकायत में यह भी आरोप है कि 2022 में आरोपी ने उनकी दो नाबालिग बेटियों के साथ भी छेड़छाड़ (Molestation) की। इन गंभीर आरोपों ने पूरे मामले को और जटिल बना दिया है, क्योंकि इसमें न केवल एक वयस्क, बल्कि दो नाबालिग बच्चियों का यौन शोषण (POCSO Case) शामिल है।
भोईवाडा पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया और पीड़िता का विस्तृत बयान दर्ज किया। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और बच्चों के यौन शोषण से संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) के तहत मामला दर्ज किया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, जांच अभी चल रही है और अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस सावधानीपूर्वक जांच कर रही है, ताकि सभी तथ्यों को सही ढंग से सामने लाया जा सके।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि इसमें शामिल दोनों पक्ष केईएम अस्पताल जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से जुड़े हैं। शिकायतकर्ता के पति और आरोपी के बीच लंबे समय से पेशेवर विवाद चल रहा था, जो इस मामले में एक अतिरिक्त आयाम जोड़ता है। यह विवाद क्या इस घटना का कारण बना, यह अभी जांच का विषय है। लेकिन यह स्पष्ट है कि इस तरह की घटनाएं कार्यस्थल पर शक्ति के दुरुपयोग और व्यक्तिगत संबंधों में तनाव की गंभीर समस्याओं को उजागर करती हैं।
केईएम अस्पताल, जो मुंबई का एक प्रमुख चिकित्सा संस्थान है, पहले भी विवादों में रहा है। अप्रैल 2025 में, अस्पताल के एक अन्य प्रोफेसर, डॉ. रविंद्र देवकर, पर छह महिला डॉक्टरों ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उस मामले में भी भोईवाडा पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी, और आरोपी को अग्रिम जमानत से वंचित कर दिया गया था। इस तरह की लगातार घटनाएं यह सवाल उठाती हैं कि क्या अस्पताल जैसे संवेदनशील कार्यस्थलों में कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त उपाय किए जा रहे हैं।
मुंबई में यौन शोषण और बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले पिछले कुछ वर्षों में बढ़े हैं। 2024 में, मुंबई में बच्चों के यौन शोषण (POCSO Case) के मामलों में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें 1,341 मामले सामने आए। इनमें से अधिकांश मामले बलात्कार और छेड़छाड़ से संबंधित थे। यह आंकड़े समाज में बढ़ती जागरूकता के साथ-साथ ऐसी घटनाओं की गंभीरता को भी दर्शाते हैं। खासकर, अगस्त 2024 में बडलापुर में एक स्कूल के कर्मचारी द्वारा दो नाबालिग बच्चों के यौन शोषण की घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। इस तरह की घटनाओं ने पुलिस और प्रशासन को और सख्ती से काम करने के लिए प्रेरित किया है।
इस मामले में पीड़िता की हिम्मत सराहनीय है, जिन्होंने न केवल अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई, बल्कि अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिए भी कदम उठाया। यह घटना समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए और क्या कदम उठाए जाने चाहिए। खासकर, जब आरोपी एक जिम्मेदार पद पर हो, तो ऐसी घटनाएं विश्वास को तोड़ती हैं और समाज में डर का माहौल पैदा करती हैं।
भोईवाडा पुलिस की जांच अब इस मामले में अगला कदम तय करेगी। पीड़िता के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या वाकई में ये घटनाएं 2022 से 2025 के बीच हुईं, और क्या इसमें और भी लोग शामिल हैं। इस बीच, केईएम अस्पताल प्रशासन ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है।
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