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NEET 2027 में होगा बड़ा बदलाव? पेपर-पेन से लेकर AI निगरानी तक बदल सकता है परीक्षा का पूरा सिस्टम

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NEET UG 2027 की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा को अधिक सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए कई बदलावों पर विचार किया जा रहा है। नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड टास्क फोर्स परीक्षा व्यवस्था और NTA के कामकाज में सुधार को लेकर सुझाव तैयार कर रही है। इस प्रक्रिया में पूर्व ISRO अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पिछली समिति की सिफारिशों पर भी चर्चा हुई है।

हालांकि, ये साफ समझना जरूरी है कि इनमें से सभी बदलाव अभी अंतिम नियम नहीं हैं। NEET 2027 का अंतिम पैटर्न आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

पेन-पेपर की जगह कंप्यूटर पर हो सकती है परीक्षा

NEET UG को मौजूदा पेन-पेपर और OMR व्यवस्था से हटाकर Computer-Based Test यानी CBT में बदलने की संभावना पर काम चल रहा है। इस व्यवस्था में अभ्यर्थी कंप्यूटर पर प्रश्न हल करेंगे। परीक्षा को डिजिटल माध्यम में ले जाने का एक उद्देश्य प्रश्नपत्र की भौतिक आवाजाही और उससे जुड़े सुरक्षा जोखिमों को कम करना भी है।

पूर्व ISRO अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की समिति ने भी परीक्षा व्यवस्था को अधिक तकनीक आधारित बनाने और कंप्यूटर आधारित परीक्षा की दिशा में बढ़ने की सिफारिश की थी।

परीक्षा केंद्रों पर बढ़ेगी तकनीकी निगरानी

प्रस्तावित बदलावों में परीक्षा केंद्रों की निगरानी के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर है। AI और डेटा एनालिटिक्स की मदद से परीक्षा के दौरान असामान्य गतिविधियों और संभावित गड़बड़ी के पैटर्न को पहचानने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।

इसके अलावा उम्मीदवारों की पहचान के लिए फेस ऑथेंटिकेशन, CCTV निगरानी और डिजिटल सुरक्षा प्रक्रियाओं को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। NTA के नए सुरक्षा ढांचे में CISF की भूमिका और विशेषज्ञ कर्मचारियों को शामिल करने की जानकारी भी सामने आई है।

साल में एक से ज्यादा बार हो सकती है परीक्षा?

NEET को साल में एक से ज्यादा बार कराने का सुझाव भी चर्चा में है। कुछ हितधारकों ने JEE Main की तरह परीक्षा को कई चरणों में आयोजित करने का प्रस्ताव दिया है। एक सुझाव में साल में चार बार तक परीक्षा कराने की बात भी सामने आई है।

इसका मतलब यह हो सकता है कि किसी एक परीक्षा में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं करने वाले छात्रों को उसी वर्ष दोबारा अवसर मिल सके। लेकिन अभी यह केवल प्रस्ताव है और इसे NEET 2027 का तय नियम नहीं माना जा सकता।

12वीं के नंबरों को भी मिल सकता है महत्व

परीक्षा सुधार से जुड़े सुझावों में 12वीं बोर्ड के अंकों को भी कुछ महत्व देने की बात सामने आई है। इसका उद्देश्य मेडिकल प्रवेश की प्रक्रिया में केवल एक प्रवेश परीक्षा के प्रदर्शन के अलावा छात्र के बोर्ड प्रदर्शन को भी शामिल करना हो सकता है।

हालांकि, 12वीं के अंकों को NEET मेरिट में कितना और किस तरीके से शामिल किया जाएगा, इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

NTA के ढांचे में भी बदलाव

सुधार केवल NEET के प्रश्नपत्र और परीक्षा केंद्र तक सीमित नहीं हैं। परीक्षा कराने वाली संस्था NTA के प्रशासनिक और तकनीकी ढांचे में भी बदलाव किए जा रहे हैं।

स्थायी विशेषज्ञ कर्मचारियों, बेहतर तकनीकी व्यवस्था और परीक्षा से जुड़े संवेदनशील कामों के लिए मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी परीक्षा प्रक्रिया में स्थायी और संस्थागत सुधार की जरूरत पर जोर दिया है।

राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों से क्या संबंध?

2024 के NEET विवाद के बाद पूर्व ISRO अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई थी। इस समिति ने परीक्षा प्रक्रिया, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, OMR मूल्यांकन और NTA के ढांचे सहित कई क्षेत्रों में सुधार की सिफारिशें की थीं।

अब नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाली नई टास्क फोर्स इन सुधारों की दिशा में आगे की व्यवस्था पर काम कर रही है।

NEET 2027 के छात्रों के लिए क्या जरूरी है?

फिलहाल छात्रों को अपनी पढ़ाई मौजूदा आधिकारिक पाठ्यक्रम और उपलब्ध परीक्षा नियमों के अनुसार जारी रखनी चाहिए। संभावित बदलावों को लेकर तैयारी के स्तर पर कुछ चीजों का अभ्यास किया जा सकता है।

अगर परीक्षा CBT मोड में जाती है, तो कंप्यूटर आधारित मॉक टेस्ट देना उपयोगी रहेगा। साथ ही समय प्रबंधन, स्क्रीन पर प्रश्न पढ़ने और ऑनलाइन टेस्ट इंटरफेस के साथ अभ्यास करने की आदत बनाई जा सकती है।

सबसे अहम बात यह है कि NEET 2027 का अंतिम परीक्षा पैटर्न अभी घोषित नहीं हुआ है। इसलिए परीक्षा कितनी बार होगी, CBT लागू होगा या नहीं और 12वीं के अंकों को कोई वेटेज मिलेगा या नहीं—इन सभी सवालों का अंतिम जवाब आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही मिलेगा। नंदन नीलेकणी के नेतृत्व वाली टास्क फोर्स की पहली अंतरिम रिपोर्ट सितंबर 2026 के अंत तक आने की बात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताई है।

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