Malegaon Fake Birth Certificate Scam: बीजेपी नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने एक सनसनीखेज खुलासा किया। उन्होंने दावा किया कि मालेगांव में 1044 बांग्लादेशी घुसपैठियों (Bangladeshi Infiltrators) ने फर्जी दस्तावेजों और कोर्ट के नकली आदेशों का इस्तेमाल कर जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate Scam) हासिल किए। इस घोटाले ने न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया, बल्कि देश की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
यह कहानी उस समय शुरू हुई, जब सोमैया ने मालेगांव नगर निगम के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने पिछले कुछ महीनों में चार बार मालेगांव का दौरा किया और नगर निगम व तहसील कार्यालयों में अधिकारियों से मुलाकात की। उनकी जांच-पड़ताल में पता चला कि बांग्लादेशी घुसपैठियों (Bangladeshi Infiltrators) को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate Scam) जारी किए जा रहे हैं। सोमैया ने इस मामले को गंभीरता से लिया और सरकार से कार्रवाई की मांग की। उनके प्रयासों का नतीजा यह हुआ कि विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।
SIT की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच दल ने पाया कि मालेगांव नगर निगम में अधिकारियों ने बिना पर्याप्त जांच के जन्म प्रमाण पत्र जारी किए। कई मामलों में फर्जी कोर्ट आदेश प्रस्तुत किए गए, जिन्हें बिना सत्यापन के स्वीकार कर लिया गया। इस लापरवाही के लिए तत्कालीन तहसीलदार नितिन कुमार देवरे और नायब तहसीलदार संदीप धरणकर को निलंबित कर दिया गया। राजस्व एवं वन विभाग के संयुक्त सचिव अजीत देशमुख ने इस निलंबन का आदेश दिया। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ अधिकारियों ने नकली दस्तावेजों को जानबूझकर नजरअंदाज किया।
सोमैया ने अपने दावे में बताया कि मालेगांव में 1044 लोगों ने फर्जी कोर्ट आदेशों के जरिए जन्म प्रमाण पत्र हासिल किए। इनमें से एक 90 वर्षीय सैयद मासूम रसूल भी शामिल हैं, जिनके खिलाफ 10 जून 2025 को FIR दर्ज की गई। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि 123 लोगों की जन्म तिथि 1 जनवरी दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई। सोमैया ने यह भी खुलासा किया कि 40 घुसपैठियों ने इन फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल कर पासपोर्ट तक हासिल कर लिए।
इस घोटाले का खुलासा होने के बाद मालेगांव पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी। 17 जनवरी 2025 को सोमैया ने छावनी थाने में 110 नागरिकों की सूची सौंपी थी, जिसके आधार पर जांच शुरू हुई। बाद में यह संख्या बढ़कर 1044 तक पहुंच गई। 2 फरवरी 2025 को तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिन्हें 4 फरवरी तक पुलिस हिरासत में रखा गया। इसके अलावा, मालेगांव नगर निगम के उप निबंधक अब्दुल तवाब उर्फ अब्दुल रज्जाक को भी गिरफ्तार किया गया। उन पर फर्जी प्रमाण पत्र छापने का आरोप है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने नासिक के पुलिस महानिरीक्षक की अध्यक्षता में SIT का गठन किया, जिसमें जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। फडणवीस ने करीब 40,000 जन्म प्रमाण पत्रों को रद्द करने का आदेश दिया, जो गैरकानूनी तरीके से नायब तहसीलदारों द्वारा जारी किए गए थे। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने भी पुष्टि की कि SIT पहले से जारी प्रमाण पत्रों और लंबित आवेदनों की गहन जांच करेगी।
सोमैया ने दावा किया कि यह घोटाला मालेगांव तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, अकोला, अमरावती, लातूर, और परभणी जैसे जिलों में भी फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए हैं। अकोला में 15,845, अमरावती के अंजनगांव में 1,400, और लातूर में 2,000 से ज्यादा बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं को फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस रैकेट के पीछे संगठित गिरोह और कुछ बड़े राजनेता शामिल हैं। सोमैया ने कहा कि यह घोटाला देश की सुरक्षा के लिए खतरा है, क्योंकि इससे मुंबई सहित कई शहरों की जनसांख्यिकी बदलने का जोखिम पैदा हो गया है।
मालेगांव, जो मुस्लिम बहुल क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, इस घोटाले का केंद्र बनकर उभरा। सोमैया ने बताया कि 2023 में जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम में संशोधन के बाद तहसीलदारों को जन्म प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार मिला। लेकिन इस प्रावधान का दुरुपयोग हुआ। एक साल के भीतर ही 1,000 से ज्यादा बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं को प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। कुछ मामलों में तो फर्जी आधार कार्ड और शपथ पत्रों का इस्तेमाल किया गया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कई घुसपैठियों ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर न केवल जन्म प्रमाण पत्र, बल्कि वोटर कार्ड और पासपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज भी हासिल किए। इससे न केवल प्रशासनिक भ्रष्टाचार उजागर हुआ, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी। मालेगांव में 3,977 बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी प्रमाण पत्र बनाए जाने का दावा किया गया। इनमें से कई के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 318(4), 338, 336(3), और 340(2) के तहत मामले दर्ज किए गए।
यह घोटाला उस समय और चर्चा में आया, जब सोमैया ने 2 जून 2025 को मालेगांव के किल्ला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की। उनकी शिकायत के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया। 15 जून 2025 को सोमैया ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि 1044 लोगों ने फर्जी कोर्ट आदेशों के जरिए जन्म प्रमाण पत्र हासिल किए। उन्होंने यह भी उजागर किया कि इनमें से कई लोगों की जन्म तिथि 1 जनवरी दर्ज है, जो इस घोटाले की सुनियोजित प्रकृति को दर्शाता है।
मालेगांव का यह घोटाला केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं है। यह देश की आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाता है। सोमैया के लगातार प्रयासों और SIT की जांच ने इस रैकेट के कई पहलुओं को उजागर किया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस घोटाले में और कौन-कौन शामिल है।
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