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Narayan Rane Pleads Not Guilty in Sanjay Raut Case: संजय राउत के मानहानि केस में नारायण राणे का बड़ा बयान, कोर्ट में क्या हुआ?

Narayan Rane Pleads Not Guilty in Sanjay Raut Case: संजय राउत के मानहानि केस में नारायण राणे का बड़ा बयान, कोर्ट में क्या हुआ?

Narayan Rane Pleads Not Guilty in Sanjay Raut Case: मुंबई में एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लोकसभा सांसद नारायण राणे ने सोमवार को मुंबई की एक अदालत में अपने ऊपर लगे मानहानि के मामले में खुद को निर्दोष बताया। यह मामला शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत ने दायर किया था। राउत का कहना है कि राणे ने साल 2023 में उनके खिलाफ कुछ गलत और अपमानजनक बातें कही थीं।

यह पूरा विवाद जनवरी 2023 में भांडुप में हुए कोंकण फेस्टिवल से शुरू हुआ। राणे ने अपने भाषण में कथित तौर पर कहा था कि संजय राउत का नाम वोटर लिस्ट में नहीं था और यह भी दावा किया था कि जब वे दोनों शिवसेना में थे, तब राणे ने राउत को राज्यसभा में चुनवाने में मदद की थी। राउत ने इन बयानों को झूठा और उनकी छवि को खराब करने वाला बताया। उन्होंने राणे के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया और कहा कि ये बातें सिर्फ उनकी बदनामी के लिए कही गई थीं।

मुंबई की मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में राणे ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे निर्दोष हैं। कोर्ट ने उनके इस बयान को दर्ज कर लिया और अब इस मामले में ट्रायल शुरू होगा। गवाहों की जांच-पड़ताल 11 नवंबर से शुरू होने वाली है। इससे पहले अप्रैल 2023 में कोर्ट ने राउत की शिकायत को स्वीकार करते हुए कहा था कि राणे के बयान प्रथम दृष्टया अपमानजनक थे। कोर्ट ने यह भी देखा कि राणे के बयानों का कोई ठोस सबूत नहीं था और ये सार्वजनिक रूप से बोले गए थे, जिससे राउत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।

राणे ने कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देने की कोशिश की थी। उन्होंने विशेष सत्र न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि यह शिकायत सिर्फ राजनीतिक बदला लेने के लिए की गई है। उनका दावा था कि उनके बयान राजनीतिक चर्चा का हिस्सा थे, न कि किसी निजी दुश्मनी का। लेकिन कोर्ट ने उनकी इस याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि राणे के बयान बिना सबूत के थे और इनमें राउत की छवि को नुकसान पहुंचाने की मंशा दिखती है।

राउत ने कोर्ट में कुछ दस्तावेज भी पेश किए, जिनमें 2002 की वोटर लिस्ट का एक हिस्सा शामिल था। इस लिस्ट से साबित हुआ कि राउत उस समय रजिस्टर्ड वोटर थे। कोर्ट ने इसे भी ध्यान में रखा और राणे के दावों को गलत माना। इस मामले में अब सबकी नजरें 11 नवंबर से शुरू होने वाले ट्रायल पर टिकी हैं, जहां गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। यह मामला मुंबई की सियासत में एक बड़ा मुद्दा बन गया है, क्योंकि राणे और राउत दोनों ही बड़े राजनीतिक चेहरे हैं और दोनों के बीच पहले भी कई बार तीखी बयानबाजी हो चुकी है।

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