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क्या होता है Tracheostomy, जिसे लेने से मना कर दिया था ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ के एक्टर Michael Patrick ने?

Tracheostomy
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What is Tracheostomy: ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ के फेमस एक्टर Michael Patrick ने 35 वर्ष की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। मिली जानकारी के अनुसार वो मोटर न्यूरॉन डिजीज नाम की बीमारी से पीड़ित थे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोटर न्यूरॉन डिजीज एक दुर्लभ लेकिन बेहद गंभीर बीमारी है, जो धीरे-धीरे शरीर की नसों को प्रभावित करती है। इस रोग में मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में मौजूद मोटर न्यूरॉन्स धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं। ये वही नसें होती हैं जो मांसपेशियों को नियंत्रित करती हैं।

जब ये न्यूरॉन्स कमजोर या खत्म होने लगते हैं, तो शरीर की मांसपेशियों पर असर पड़ता है। मरीज को धीरे-धीरे कमजोरी महसूस होने लगती है, मांसपेशियां सख्त होने लगती हैं और उनका नाश होने लगता है। इसका असर रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी पड़ता है, जैसे चलना, बोलना, खाना निगलना और यहां तक कि सांस लेना भी मुश्किल हो सकता है।

ये बीमारी समय के साथ लगातार बढ़ती जाती है और फिलहाल इसका कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है। सही देखभाल और इलाज से इसके लक्षणों को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन गंभीर स्थिति में ये जानलेवा भी साबित हो सकती है।

गौरतलब है कि ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ के एक्टर Michael Patrick लंबे समय से इस बीमारी से पीड़ित थे। ऐसे में परेशान होकर उन्होंने इस जीवन को अलविदा कहने में ही अपनी भलाई समझी, और अंजाम ये हुआ कि उन्होंने ट्रेकियोस्टोमी (Tracheostomy) लेने से इनकार कर दिया, जिसका परिणाम ये हुआ की उनकी मौत हो गई। ऐसे में अब ये सवाल बहुत सारे लोगों के मन में उठ रहा है कि आखिर ये ट्रेकियोस्टोमी होता क्या है, तो आइए जानते हैं उस बारे में विस्तार से –

ट्रेकियोस्टोमी क्या होती है?

ट्रेकियोस्टोमी (Tracheostomy) एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें सर्जन गर्दन के सामने एक छोटा सा छेद बनाकर उसे श्वासनली (ट्रेकिया) तक पहुंचाता है। इस छेद के जरिए एक ट्यूब डाली जाती है, जिसे ट्रेकियोस्टोमी ट्यूब या “ट्रैक” कहा जाता है। ये ट्यूब सीधे फेफड़ों तक हवा पहुंचाने में मदद करती है, जिससे मरीज आसानी से सांस ले सकता है। इस प्रक्रिया को तकनीकी रूप से ट्रेकियोटॉमी भी कहा जाता है, लेकिन आमतौर पर दोनों शब्दों का इस्तेमाल एक ही अर्थ में किया जाता है।

कब पड़ती है ट्रेकियोस्टोमी की जरूरत?

जब किसी व्यक्ति को सामान्य तरीके से यानी नाक या मुंह से सांस लेने में कठिनाई होती है, तब ट्रेकियोस्टोमी (Tracheostomy) की जरूरत पड़ सकती है। ये स्थिति कई कारणों से उत्पन्न हो सकती है।

अगर वायुमार्ग में रुकावट या संकुचन हो और सामान्य इंट्यूबेशन संभव न हो, तो ये प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके अलावा, फेफड़ों की गंभीर बीमारी, लकवा, या सिर और गर्दन की चोट के कारण भी सांस लेने में दिक्कत हो सकती है, जहां ये प्रक्रिया मददगार साबित होती है।

कई बार गले या स्वरयंत्र की सर्जरी के बाद मरीज को कुछ समय तक सांस लेने में सहायता की आवश्यकता होती है। वहीं, अगर किसी मरीज को लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रखना पड़े, तो भी ट्रेकियोस्टोमी की जाती है।

बलगम और वायुमार्ग की सफाई में मदद

कुछ बीमारियों में मरीज के लिए खांसकर बलगम बाहर निकालना मुश्किल हो जाता है। ऐसे मामलों में ट्रेकियोस्टोमी (Tracheostomy) ट्यूब वायुमार्ग को साफ रखने का एक रास्ता प्रदान करती है। इससे बलगम आसानी से बाहर निकाला जा सकता है और सांस लेने में राहत मिलती है।

अस्थायी या स्थायी हो सकती है प्रक्रिया

ट्रेकियोस्टोमी (Tracheostomy) मरीज की स्थिति के आधार पर अस्थायी या स्थायी दोनों हो सकती है। कई मामलों में जब मरीज की स्थिति सुधर जाती है, तो ट्यूब हटा दी जाती है और छेद धीरे-धीरे भर जाता है। लेकिन कुछ गंभीर स्थितियों में इसे स्थायी रूप से रखना पड़ सकता है।

इमरजेंसी और प्लान्ड दोनों स्थितियों में उपयोग

ये प्रक्रिया आमतौर पर पहले से योजना बनाकर (इलेक्टिव) की जाती है, लेकिन कई बार आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत भी करनी पड़ सकती है। खासकर जब मरीज की सांस पूरी तरह से रुकने की स्थिति में हो, तब ये तुरंत जीवन बचाने का माध्यम बन जाती है।

ट्रेकियोस्टोमी (Tracheostomy) एक महत्वपूर्ण मेडिकल प्रक्रिया है, जो गंभीर परिस्थितियों में मरीज की जान बचाने में अहम भूमिका निभाती है। सही समय पर इसका उपयोग न केवल सांस लेने में मदद करता है, बल्कि मरीज की जीवन गुणवत्ता को भी बेहतर बना सकता है।

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