Canada–India relations: कनाडा की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के साथ ही भारत के प्रति ओटावा के सुर पूरी तरह बदल गए हैं। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा से ठीक पहले कनाडा सरकार का यह स्वीकार करना कि हालिया हिंसा की वारदातों में भारत का कोई हाथ नहीं है, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का सबसे बड़ा ‘यू-टर्न’ माना जा रहा है।
अविश्वास की दीवार गिरी: निज्जर विवाद पर पूर्ण विराम?
पिछले कुछ वर्षों से भारत और कनाडा के रिश्तों में जमी बर्फ अब पिघलती नजर आ रही है। जहाँ पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन टूडो ने जून 2023 में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप सीधा भारत पर लगाया था, वहीं मार्क कार्नी प्रशासन ने अब स्पष्ट कर दिया है कि:
- भारत के खिलाफ हिंसा की किसी भी साजिश के प्रमाण नहीं हैं।
- दोनों देशों के बीच अब अविश्वास (Mistrust) की कोई जगह नहीं है।
- कनाडा अब ‘सिख उग्रवाद’ के मुद्दे पर भारत की चिंताओं को बेहतर ढंग से समझने का संकेत दे रहा है।
कार्नी का ‘मुंबई-दिल्ली’ रोडमैप: व्यापार पर फोकस
मार्क कार्नी की चार दिवसीय यात्रा का मुख्य उद्देश्य आर्थिक हितों को सर्वोपरि रखना है। टूडो के विपरीत, कार्नी अपनी यात्रा के दौरान पंजाब नहीं जाएंगे, जो इस बात का संकेत है कि वे घरेलू राजनीति के बजाय द्विपक्षीय संबंधों के ‘रीसेट’ पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
| पड़ाव / तिथि | स्थान | मुख्य गतिविधि |
|---|---|---|
| 27-28 फरवरी | मुंबई | दिग्गज उद्यमियों और निवेशकों के साथ राउंड-टेबल बैठक |
| 1 मार्च | नई दिल्ली | राजधानी आगमन और कूटनीतिक मुलाकातें |
| 2 मार्च | नई दिल्ली | पीएम नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय वार्ता और कार्नी-मोदी सीईओ फोरम |
‘5 लाख करोड़’ का लक्ष्य और शिक्षा का अर्थशास्त्र
कार्नी का लक्ष्य भारत के साथ FTA (मुक्त व्यापार समझौता) को जल्द से जल्द अंजाम देना है, ताकि द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 5 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचाया जा सके।
- भारतीय छात्रों की अहमियत: कनाडा की अर्थव्यवस्था में भारतीय छात्रों का योगदान सालाना 1.5 लाख करोड़ रुपये है।
- कोटा विस्तार: उम्मीद है कि कार्नी भारतीय छात्रों के लिए वीजा कोटा बढ़ाने की घोषणा करेंगे, जो पिछले कुछ समय से तनाव के कारण प्रभावित था।
वैश्विक संदर्भ: अमेरिका की भी भारत पर नजर
कनाडा के इस कदम के बीच अमेरिकी वाणिज्य मंत्री होवार्ड लुटनिक का भारत दौरा भी काफी अहम है। पीयूष गोयल के साथ उनकी मुलाकात यह दर्शाती है कि उत्तर अमेरिकी देश (कनाडा और अमेरिका) भारत को एक अनिवार्य आर्थिक शक्ति के रूप में देख रहे हैं। ट्रेड डील को लेकर जो बैठकें टाली गई थीं, उनका फिर से शुरू होना एक सकारात्मक संकेत है।
मार्क कार्नी का भारत आना और टूडो युग की कड़वाहट को पीछे छोड़ना एक नई शुरुआत है। “रिश्तों का रीसेट” न केवल सुरक्षा चिंताओं को दूर करेगा, बल्कि शिक्षा और व्यापार के क्षेत्र में दोनों देशों के लिए समृद्धि के नए द्वार खोलेगा।































