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गर्मी पर ‘बेमौसम’ ब्रेक: बारिश ने बिगाड़ा बाजार का खेल, एसी-फ्रिज की बिक्री 15% गिरी, इन्वेंट्री फंसने का डर

गर्मी
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नई दिल्ली: उत्तर भारत में मार्च के महीने में गर्मी बढ़ने के बजाय बादलों के डेरे और बेमौसम बारिश ने कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर की चिंता बढ़ा दी है। अप्रैल की शुरुआत से पहले जिस समय एसी, कूलर और ठंडे पेयों की मांग चरम पर होनी चाहिए थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है। पिछले एक हफ्ते के भीतर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स: खरीदारी की रफ्तार पर लगा ‘पाॅज’
दिग्गज कंपनी हायर इंडिया (Haier India) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में उनकी बिक्री में लगभग 15% की गिरावट आई है।

* तात्कालिक मांग टली: हायर इंडिया के प्रेसिडेंट एनएस सतीश का कहना है कि सीजन की शुरुआत काफी उत्साहजनक और मजबूत थी, लेकिन अचानक तापमान गिरने से ग्राहकों ने अपनी खरीदारी की योजना फिलहाल टाल दी है।
* इन्वेंट्री का संकट: कंपनियों ने गर्मी को देखते हुए भारी स्टॉक जमा किया था, लेकिन अब मांग कम होने से ‘इन्वेंट्री’ फंसने का डर सता रहा है।

ठंडे पेय और डेयरी उत्पादों पर भी असर
यह गिरावट केवल एसी और फ्रिज तक सीमित नहीं है। आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स और अन्य डेयरी उत्पादों की मांग भी नरम पड़ गई है।

* मदर डेयरी के डिप्टी एमडी जयतीर्थ चारी के अनुसार, मार्च का महीना बिजनेस में गति पकड़ने का समय होता है, लेकिन बेमौसम बारिश ने इस गति को धीमा कर दिया है।
* पिछले साल भी अप्रैल से जुलाई के बीच इसी तरह की बारिश ने कूलिंग प्रोडक्ट्स की बिक्री को 15-20% तक प्रभावित किया था। उद्योग जगत को डर है कि कहीं इस बार भी इतिहास खुद को न दोहरा दे।

बाजार की वर्तमान स्थिति के 3 मुख्य बिंदु
* ग्राहक की प्रतीक्षा: तापमान कम होने से उपभोक्ता अब गर्मी के और बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं, जिससे रिटेल आउटलेट्स पर फुटफॉल (ग्राहकों का आना) कम हो गया है।
* पिछले साल का साया: कंपनियां अभी भी पिछले साल के नुकसान को भूली नहीं हैं। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा, तो कंपनियों को अपना प्रोडक्शन प्लान बदलना पड़ सकता है।
* सिर्फ एसी ही नहीं, कूलर-पंखे भी सुस्त: मध्यम वर्ग जो कूलर और पंखों पर निर्भर है, वहां भी मांग में भारी कमी देखी गई है।

मौसम के मिजाज पर टिका भविष्य
फिलहाल कंपनियों की उम्मीदें अब अप्रैल के दूसरे पखवाड़े पर टिकी हैं। यदि तापमान में दोबारा तेजी आती है, तो बाजार में रिकवरी की संभावना है। लेकिन अब सिर्फ मौसम की भविष्यवाणी ही यह तय करेगी कि कंपनियों का मुनाफा बढ़ेगा या उन्हें भारी स्टॉक के साथ बैठना पड़ेगा।

विशेषज्ञ की राय: “जब तक पारा 40 डिग्री के पार नहीं जाता, तब तक कूलिंग कैटेगरी में वैसी तेजी नहीं दिखेगी जैसी उम्मीद की गई थी। यह मौसम कंपनियों के लिए ‘वेट एंड वॉच’ (इंतजार करो और देखो) की स्थिति पैदा कर रहा है।

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