पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने ईंधन को लेकर अहम फैसला लिया है। सरकार ने एक ओर आम जनता को राहत देते हुए घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल पर टैक्स में कटौती की है, वहीं दूसरी ओर निर्यात होने वाले डीजल और हवाई ईंधन (ATF) पर ड्यूटी बढ़ा दी है।
क्या है पूरा मामला?
ईरान-इजरायल जैसे हालातों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की लागत पर पड़ रहा है। इसी बीच कुछ अंतरराष्ट्रीय कारोबारी भारत से अपेक्षाकृत सस्ता डीजल और एटीएफ खरीदकर मुनाफा कमा रहे थे।
इस स्थिति को नियंत्रित करने और घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने निर्यात पर अतिरिक्त ड्यूटी लगाने का फैसला किया है।
घरेलू ग्राहकों को राहत
सरकार ने देश के भीतर इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इस कदम का उद्देश्य बढ़ती कीमतों के बीच आम लोगों को राहत देना है।
निर्यात पर बढ़ी ड्यूटी
नए फैसले के तहत निर्यात होने वाले डीजल और एटीएफ पर ड्यूटी में बड़ा इजाफा किया गया है। अब निर्यात वाले डीजल पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपये प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी लागू की गई है। इससे कंपनियों के लिए निर्यात कम आकर्षक होगा और घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनी रहेगी।
वित्त मंत्री का बयान
केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि वैश्विक संकट के बीच देश में ईंधन की कीमतें नियंत्रित रहें और आम जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
In view of the West Asia crisis, the central excise duty on petrol and diesel for domestic consumption has been reduced by ₹10 per litre each. This will provide protection to consumers from rise in prices. Hon. PM @narendramodi has always ensured that citizens are protected from…
— Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) March 27, 2026
क्या ग्राहकों पर पड़ेगा असर?
Indian Oil सहित प्रमुख तेल कंपनियों के अनुसार, इस फैसले का सीधा असर आम ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का ये कदम दोहरे उद्देश्य को ध्यान में रखकर उठाया गया है। एक तरफ आम जनता को महंगाई से राहत देना और दूसरी तरफ देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना।
ये फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ईंधन संकट की आशंका बढ़ रही है। ऐसे में सरकार की ये रणनीति भारत के ऊर्जा संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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