नई दिल्ली: भारत अपनी सैन्य शक्ति को वैश्विक स्तर पर और अधिक घातक और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा चुका है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की महत्वपूर्ण बैठक में 2.38 लाख करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई है। इस ऐतिहासिक फैसले का मुख्य उद्देश्य थल सेना, वायु सेना और तटरक्षक बल की ऑपरेशनल क्षमता और निगरानी शक्ति को कई गुना बढ़ाना है।
तीनों सेनाओं के लिए क्या खास है?
इस भारी-भरकम बजट के माध्यम से तीनों सेनाओं को अत्याधुनिक हथियार और सिस्टम दिए जाएंगे:
* भारतीय सेना (Army): सेना के लिए नए एयर डिफेंस सिस्टम और स्वदेशी धनुष तोप की खरीद को मंजूरी दी गई है। यह सीमा पर दुश्मनों के दांत खट्टे करने में गेम-चेंजर साबित होंगे।
* वायुसेना (Air Force): आसमान में भारत की बादशाहत कायम रखने के लिए S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम, नए ट्रांसपोर्ट विमान और आधुनिक ड्रोन खरीदे जाएंगे। S-400 सिस्टम लंबी दूरी से ही दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को नष्ट करने में सक्षम है।
* तटरक्षक बल (Coast Guard): समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और तटीय निगरानी को मजबूत करने के लिए नए हॉवरक्राफ्ट की खरीद पर मुहर लगी है।
रक्षा बजट और भविष्य का रोडमैप
शुक्रवार को पास हुए इन प्रस्तावों के साथ ही चालू वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा क्षेत्र के लिए एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है:
* इस वित्त वर्ष में अब तक कुल 6.73 लाख करोड़ रुपये के 55 प्रस्तावों को मंजूरी मिल चुकी है।
* यह निवेश न केवल सेना को आधुनिक बनाएगा, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत घरेलू रक्षा उत्पादन को भी गति देगा।
चीन-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ेगी निगरानी
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन और S-400 जैसे सिस्टम की खरीद से वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LoC) पर भारत की निगरानी क्षमता अत्यधिक सटीक हो जाएगी। ट्रांसपोर्ट विमानों की मदद से दुर्गम इलाकों में सैनिकों और रसद को तेजी से पहुँचाना आसान होगा।
राजनाथ सिंह के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। 2.38 लाख करोड़ का यह निवेश भारतीय सेनाओं को भविष्य के युद्धों (Future Warfare) के लिए पूरी तरह तैयार कर देगा।






























