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भारतीय सड़कों पर ‘रफ्तार’ का नया रिकॉर्ड: साल भर में बिकीं 47 लाख कारें, अब हैचबैक नहीं… SUVs की दीवानी हुई दुनिया!

SUV
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भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर दिया है। घरेलू बाजार में इस दौरान रिकॉर्ड 47 लाख कारों की बिक्री दर्ज की गई है। यह आंकड़ा न केवल चौकाने वाला है, बल्कि पिछले वित्त वर्ष (2024-25) की तुलना में 8.3% की शानदार वृद्धि को भी दर्शाता है। यह बढ़त भारतीय मध्यम वर्ग की बढ़ती क्रय शक्ति और अर्थव्यवस्था की मजबूती का सीधा संकेत है।

बदल गया मिजाज: छोटी कारें पीछे, बड़ी गाड़ियां आगे
इस रिकॉर्ड बिक्री के बीच सबसे दिलचस्प पहलू ग्राहकों की बदलती पसंद (Consumer Shift) रही है। मार्च के महीने में यह स्पष्ट रूप से देखा गया कि भारतीय ग्राहकों का मोह अब छोटी हैचबैक कारों से भंग हो रहा है। ग्राहक अब प्रीमियम फीचर्स, अधिक स्पेस और मिड-साइज एसयूवी (SUV) को प्राथमिकता दे रहे हैं।

* मारुति सुजुकी का बड़ा बदलाव: देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के आंकड़े इस बदलाव की गवाही दे रहे हैं। कभी बाजार पर राज करने वाली ‘मिनी’ सेगमेंट की कारें (ऑल्टो और एस-प्रेसो) मार्च में महज 11,741 यूनिट्स पर सिमट गईं। इसके विपरीत, ब्रेजा, ग्रैंड विटारा और इनविक्टो जैसी बड़ी गाड़ियों की मांग छह गुना ज्यादा रही, जिनकी कुल 71,356 यूनिट्स बिकीं।

महिंद्रा और किआ की ऊंची छलांग
एसयूवी के प्रति बढ़ते इस जुनून का सबसे ज्यादा फायदा उन कंपनियों को हुआ है जिनका पोर्टफोलियो मजबूत और सुरक्षित है:

* महिंद्रा एंड महिंद्रा: कंपनी ने अपनी कुल बिक्री में 21% का भारी उछाल दर्ज किया है। स्कॉर्पियो-N और XUV700 जैसे मॉडल्स की भारी मांग ने इस आंकड़े को छूने में मदद की।
* किआ इंडिया (Kia India): सुरक्षा को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग वाली सेल्टोस के दम पर किआ इंडिया ने मार्च महीने में अपनी अब तक की सबसे बड़ी बिक्री दर्ज कर इतिहास रच दिया है।

मध्यम वर्ग का प्रीमियम ‘स्वैग’
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अब मध्यम वर्ग केवल ‘आने-जाने’ के साधन के तौर पर कार नहीं खरीद रहा, बल्कि वह प्रीमियम अनुभव, एडवांस्ड फीचर्स और सेफ्टी पर ज्यादा खर्च करने को तैयार है। यही कारण है कि बजट कारों के बजाय 10 लाख से 20 लाख रुपये की रेंज वाली मिड-साइज एसयूवी का दबदबा बढ़ गया है।

निष्कर्ष: भारत अब केवल दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटो बाजार ही नहीं बना हुआ है, बल्कि यह गुणवत्ता और सुरक्षा की दिशा में भी तेजी से परिपक्व हो रहा है। ‘मिनी’ कारों का गिरता ग्राफ और एसयूवी का बढ़ता क्रेज यह बताता है कि भारतीय सड़कों का भविष्य अब सुरक्षित और प्रीमियम होने वाला है।

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