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ओमान मिसाइल हमले में मारे गए भारतीय नाविक का शव अब तक नहीं लौटा, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

ओमान
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ओमान तट के पास हुए मिसाइल हमले में मारे गए एक भारतीय नाविक के शव को भारत लाने की मांग अब न्यायालय तक पहुंच गई है। मृतक के परिजनों ने इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।

मृतक नाविक की पहचान दीक्षित अमृतलाल सोलंकी के रूप में हुई है, जो जहाज MT MKD Vyom पर इंजन रूम में ऑयलर के पद पर तैनात थे। एक मार्च 2026 को जहाज पर मिसाइल हमला हुआ था, जिसकी जानकारी जहाज के कैप्टन द्वारा परिवार को दी गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार विस्फोट और आग के कारण जहाज को भारी नुकसान पहुंचा और सोलंकी लापता हो गए थे। बाद में ये पुष्टि हुई कि इस हादसे में उनकी मृत्यु हो गई, जबकि जहाज के अन्य 21 क्रू सदस्य सुरक्षित बचा लिए गए।

इस घटना के बाद से परिवार लगातार शव को भारत लाने की मांग कर रहा है। मृतक के पिता अमृतलाल सोलंकी और बहन मिताली सोलंकी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर केंद्र सरकार, डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग और संबंधित शिपिंग कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि उन्हें अपने परिजन का अंतिम संस्कार करने का अधिकार है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है। साथ ही ये भी तर्क दिया गया है कि संबंधित कानूनों के अनुसार शव को जल्द भारत लाना अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

परिजनों ने आरोप लगाया है कि शव की वापसी में अनावश्यक देरी हो रही है। 24 मार्च 2026 को डिप्टी डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग द्वारा भारतीय दूतावास को दी गई जानकारी में बताया गया कि यूएई अधिकारियों की ओर से शव की वापसी में 23 दिनों की देरी हुई है। इससे पहले 18 मार्च को दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने सूचित किया था कि काफी प्रयासों के बाद मृतक के कंकाल अवशेष बरामद किए गए हैं और उन्हें आगे की प्रक्रिया के लिए शारजाह पुलिस को सौंपा जाना है। इसके बाद से परिवार को कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।

परिजनों का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्रालय, जहाजरानी मंत्रालय और भारतीय दूतावास से कई बार संपर्क किया, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट और ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक प्रक्रिया और समन्वय को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

याचिका में हाईकोर्ट से अनुरोध किया गया है कि शव को जल्द से जल्द भारत लाने के निर्देश दिए जाएं और उसे सुरक्षित रखा जाए, जब तक कि वो परिजनों को सौंपा न जाए। इसके अलावा, घटना से जुड़ी जांच रिपोर्ट, निरीक्षण रिपोर्ट, फॉरेंसिक रिपोर्ट और जहाज व घटनास्थल से संबंधित फोटो साक्ष्य भी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

इस मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की पीठ द्वारा किए जाने की संभावना है। अब ये देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या निर्देश देती है और क्या मृतक के परिवार को न्याय मिल पाता है। ये मामला न केवल एक परिवार के दर्द को दर्शाता है, बल्कि विदेशों में कार्यरत भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों से जुड़े बड़े सवाल भी उठाता है।

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