लोकसभा चुनाव की रणभेरी अब अपने चरम पर है। असम की पहाड़ियों से लेकर केरल के तटों तक, देश के दो सबसे बड़े राजनीतिक चेहरों—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी—के बीच जुबानी जंग ने सियासी तापमान को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। मंगलवार को चुनाव प्रचार का शोर थमने से ठीक पहले, दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की विचारधारा और कार्यशैली पर तीखे प्रहार किए।
असम में बरसे मोदी: “मोहब्बत नहीं, यह तो झूठ की दुकान है”
असम के होजाई में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के चर्चित नारे ‘मोहब्बत की दुकान’ की धज्जियाँ उड़ा दीं। मोदी ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जिसे कांग्रेस ‘मोहब्बत की दुकान’ कहती है, वह असल में ‘मिथ्या (झूठ) की दुकान’ है।
पीएम मोदी ने कांग्रेस पर भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा:
* राष्ट्रीय सुरक्षा पर घेरा: मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस हमेशा पाकिस्तान की भाषा बोलती है और सेना के शौर्य पर सवाल उठाती है।
* भ्रष्टाचार का प्रहार: उन्होंने जनता को आगाह किया कि कांग्रेस की राजनीति केवल झूठ की बुनियाद पर टिकी है और अब समय आ गया है कि इस ‘झूठ की दुकान’ को परमानेंट ताला लगा दिया जाए।
केरल में राहुल की ललकार: “जनता के सेवक नहीं, अहंकारी राजा हैं मोदी और विजयन”
दूसरी ओर, केरल के त्रिशूर में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी और केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन दोनों को एक ही तराजू में तौला। राहुल ने तंज कसते हुए उन्हें ‘अहंकारी राजा’ की संज्ञा दी।
राहुल गांधी ने ‘महाराजा कल्चर’ पर हमला करते हुए कहा:
* शासन बनाम सेवा: राहुल ने आरोप लगाया कि मोदी और विजयन दोनों में जनता की सेवा करने का भाव समाप्त हो गया है। उनमें अब केवल शासन करने और अपनी शक्ति दिखाने का अहंकार बचा है।
* सत्ता परिवर्तन का आह्वान: राहुल ने हुंकार भरते हुए कहा कि लोकतंत्र में राजाओं की कोई जगह नहीं है। अब वक्त आ गया है कि जनता ऐसे नेताओं को सत्ता से उखाड़ फेंके जो खुद को जनता से ऊपर समझते हैं।
9 अप्रैल की परीक्षा: थम गया प्रचार का शोर
असम और केरल में आगामी 9 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए मंगलवार शाम को प्रचार का शोर पूरी तरह थम जाएगा। अंतिम दिन दोनों पक्षों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
* असम की चुनौती: मोदी ने जहाँ राष्ट्रवाद और विकास के नाम पर वोट मांगे हैं।
* केरल की जंग: राहुल ने संविधान बचाने और ‘अहंकार’ को हराने की अपील की है।
चुनाव के इस दौर में अब गेंद जनता के पाले में है। एक तरफ पीएम मोदी का ‘राष्ट्रवाद और भ्रष्टाचार मुक्त भारत’ का विजन है, तो दूसरी तरफ राहुल गांधी का ‘तानाशाही और अहंकार के विरुद्ध’ संघर्ष। 9 अप्रैल को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि जनता ‘मिथ्या की दुकान’ के आरोप पर मुहर लगाती है या ‘अहंकारी राजा’ के तंज पर।
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