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Asset Monetisation: 28 नेशनल हाईवे मोनेटाइज करने की तैयारी में सरकार, ये दो राज्य हैं सबसे ऊपर

Asset Monetisation
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Asset Monetisation: भारत सरकार देश में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को तेज़ करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों के एसेट मोनेटाइजेशन पर बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्र सरकार ने नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन (NMP) 2.0 के तहत 28 नेशनल हाईवे एसेट्स को मोनेटाइज करने की तैयारी शुरू कर दी है। इन हाईवे प्रोजेक्ट्स की कुल लंबाई 1,800 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है और इससे सरकार को लगभग 35,000 करोड़ रुपये की आय होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार इस योजना में सबसे अधिक सड़क परियोजनाएं हरियाणा और उत्तर प्रदेश से जुड़ी हुई हैं।

क्या है एसेट मोनेटाइजेशन?

एसेट मोनेटाइजेशन का मतलब है कि सरकार पहले से तैयार और चालू सार्वजनिक परिसंपत्तियों को निजी कंपनियों या निवेशकों को निश्चित अवधि के लिए संचालन और प्रबंधन हेतु सौंपती है। इसके बदले सरकार को बड़ी राशि प्राप्त होती है, जिसका उपयोग नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में किया जाता है। हाईवे सेक्टर में ये प्रक्रिया मुख्य रूप से टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (TOT) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) मॉडल के जरिए पूरी की जाएगी।

28 हाईवे एसेट्स की तैयार हुई सूची

सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस वर्ष जिन 28 राष्ट्रीय राजमार्ग परिसंपत्तियों को मोनेटाइज किया जाएगा, उनकी विस्तृत सूची तैयार कर ली गई है। इन परियोजनाओं में कई महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे और हाई ट्रैफिक कॉरिडोर शामिल हैं। हरियाणा और उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा सड़क परियोजनाएं होने की वजह ये है कि इन राज्यों में औद्योगिक गतिविधियां और वाहन यातायात तेजी से बढ़ रहा है।

सरकार क्यों बढ़ा रही है मोनेटाइजेशन पर जोर?

सरकार अब “Infrastructure Asset Recycling” मॉडल पर अधिक जोर दे रही है। इसका उद्देश्य पुराने और चालू प्रोजेक्ट्स से पूंजी जुटाकर नए हाईवे और एक्सप्रेसवे निर्माण को फंड करना है। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार इस वर्ष मोनेटाइजेशन प्रक्रिया में दो Build-Operate-Transfer (BOT) प्रोजेक्ट और सात Engineering Procurement and Construction (EPC) प्रोजेक्ट शामिल होंगे। इसके अलावा Hybrid Annuity Model (HAM) वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी क्योंकि इनमें जोखिम अपेक्षाकृत कम माना जाता है।

पांच वर्षों में लाखों करोड़ जुटाने का लक्ष्य

सरकार ने नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन 2.0 के तहत अगले पांच वर्षों में हाईवे सेक्टर से 4.42 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया है। रोड एसेट मोनेटाइजेशन के तहत वित्त वर्ष 2026 में 59,140 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2027 में 68,770 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2028 में 91,800 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2029 में 1,04,430 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2030 में 1,17,860 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।

विदेशी निवेशकों की बढ़ेगी भागीदारी

सरकार ने हाल ही में Sovereign Wealth Funds और Pension Funds को सीधे Greenfield Toll Road Projects में निवेश की अनुमति भी दी है। इससे विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ने की संभावना है और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में लंबी अवधि का निवेश आकर्षित होगा।

पहले भी सफल रहा है हाईवे मोनेटाइजेशन मॉडल

वित्त वर्ष 2025-26 में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को हाईवे मोनेटाइजेशन से लगभग 29,000 करोड़ रुपये की आय हुई थी। इसी वर्ष की शुरुआत में मंत्रालय ने चार राज्यों के पांच हाईवे सेक्शंस को मोनेटाइज किया था, जिनकी कुल लंबाई 260 किलोमीटर से अधिक थी। ये मंत्रालय का पहला Public InvIT मॉडल था, जिससे सरकार को 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि प्राप्त हुई थी।

क्या होगा इस योजना का फायदा?

सरकार की योजना अगले तीन से पांच वर्षों में अतिरिक्त 1,500 किलोमीटर सड़कों को Public InvIT में शामिल करने की है। इससे नए एक्सप्रेसवे निर्माण, सड़क गुणवत्ता सुधार, आधुनिक टोल सिस्टम और बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत के सड़क नेटवर्क को विश्वस्तरीय बनाने और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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