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भारत का परमाणु महाशक्ति बनने की ओर निर्णायक कदम: PFBR ने रचा इतिहास, ऊर्जा स्वतंत्रता का नया सवेरा

PFBR

6 अप्रैल, 2026 की रात 8:25 बजे भारतीय विज्ञान के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई। कलपक्कम के तट पर स्थित PFBR की परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया का नियंत्रित रूप से शुरू होना केवल एक तकनीकी सफलता नहीं है, बल्कि यह भारत के ‘तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम’ के दूसरे और सबसे महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश की आधिकारिक घोषणा है। परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के सचिव डॉ. अजीत कुमार मोहंती और शीर्ष वैज्ञानिकों की उपस्थिति में मिली यह सफलता भारत को उन चुनिंदा देशों की पंक्ति में खड़ा करती है जिनके पास पूर्णतः स्वदेशी ‘फास्ट ब्रीडर’ तकनीक है।

क्या है PFBR और यह ‘ब्रीडर’ क्यों है?
परंपरागत परमाणु रिएक्टरों की तुलना में PFBR (Prototype Fast Breeder Reactor) की कार्यप्रणाली अद्वितीय है। इसे ‘ब्रीडर’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह जितनी ऊर्जा पैदा करने के लिए ईंधन (प्लूटोनियम) खर्च करता है, उससे कहीं अधिक ईंधन (युरेनियम-238 से प्लूटोनियम-239 में बदलकर) पैदा करता है।

* ईंधन चक्र: इसमें यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग होता है।
* कुशलता: यह रिएक्टर युरेनियम के उपयोग को कई गुना बढ़ा देता है, जिससे सीमित संसाधनों से भी सदियों तक बिजली बनाई जा सकती है।
* स्वदेशी तकनीक: इसकी रचना इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) ने की है और निर्माण ‘भाविनी’ (BHAVINI) द्वारा किया गया है।

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थोरियम साम्राज्य का द्वार: तीसरा चरण
भारत के पास विश्व का सबसे बड़ा थोरियम भंडार है। PFBR की सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तीसरे चरण के लिए मार्ग प्रशस्त करता है। यह रिएक्टर थोरियम-232 को युरेनियम-233 में बदलने की क्षमता रखता है। एक बार जब हम थोरियम आधारित ऊर्जा उत्पादन में महारत हासिल कर लेंगे, तो भारत को ऊर्जा के लिए किसी भी विदेशी राष्ट्र पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

सुरक्षा और नवाचार का अनूठा संगम
PFBR केवल बिजली उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि उन्नत अभियांत्रिकी का चमत्कार है:
* तरल सोडियम शीतलक: इसमें पानी के बजाय तरल सोडियम का उपयोग किया गया है, जो उच्च तापमान पर भी कुशलता से गर्मी को सोखता है।
* बंद ईंधन चक्र: यह परमाणु कचरे को न्यूनतम करता है और सामग्री का पुनर्चक्रण (Recycle) करता है।
* कठोर सुरक्षा मानक: परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) की गहन समीक्षा और कड़े सुरक्षा मानकों के बाद ही इसे चालू किया गया है।

सामरिक और आर्थिक महत्व
* आत्मनिर्भर भारत: इस परियोजना में उपयोग किए गए अधिकांश घटक स्वदेशी हैं, जो भारतीय उद्योगों और वैज्ञानिकों की क्षमता को दर्शाते हैं।
* स्वच्छ ऊर्जा (Net Zero): कार्बन उत्सर्जन को कम करने और जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए यह ‘बेस-लोड’ बिजली का एक विश्वसनीय स्रोत बनेगा।
* तकनीकी नेतृत्व: यह सफलता भारत को वैश्विक परमाणु बाजार में एक ‘प्रौद्योगिकी निर्यातक’ के रूप में स्थापित कर सकती है।

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विकसित भारत @ 2047 की नींव
2026 की यह उपलब्धि ‘विकसित भारत’ के संकल्प की दिशा में एक बड़ी छलांग है। प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को धरातल पर उतारते हुए, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की इस टीम ने साबित कर दिया है कि भारत अब परमाणु तकनीक का अनुसरणकर्ता नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता है।

PFBR का सफल संचालन आने वाली पीढ़ियों के लिए न केवल ‘सस्ती और स्वच्छ बिजली’ सुनिश्चित करेगा, बल्कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में ‘विश्वगुरु’ बनाने का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

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