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भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिला मजबूत सहारा, कतर ने दिया बड़ा आश्वासन

कतर

भारत और कतर के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर दोहा में अहम बैठक हुई, जिसमें दोनों देशों ने अपने रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने पर जोर दिया। इस बैठक में कतर के ऊर्जा मंत्री साद शेरिदा अल-काबी और भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल हुए।

बैठक के दौरान कतर ने भारत को आश्वस्त किया कि वो भविष्य में भी LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) और LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रखेगा। कतर ने खुद को भारत का भरोसेमंद ऊर्जा सप्लायर बताते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है।

रणनीतिक मुद्दों पर हुई चर्चा
बैठक के बाद हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, संस्कृति और लोगों के आपसी संबंधों जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता की जल्द वापसी की उम्मीद जताई और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

सीजफायर का स्वागत और सप्लाई चेन पर जोर
भारत और कतर दोनों ने 8 अप्रैल को घोषित दो सप्ताह के सीजफायर का स्वागत किया। इसके साथ ही वैश्विक ऊर्जा सप्लाई में आ रही बाधाओं को जल्द दूर करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। दोनों देशों ने ये भी माना कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने के लिए समुद्री मार्गों का बिना रुकावट संचालन बेहद जरूरी है।

भारत के लिए क्यों अहम है कतर?
ये दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत वैश्विक स्तर पर बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने में जुटा है। कतर भारत का सबसे बड़ा LNG और LPG सप्लायर है। भारत की कुल LNG जरूरतों का लगभग 45 प्रतिशत और LPG का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा कतर से आता है।

हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते कतर की एक प्रमुख LNG एक्सपोर्ट सुविधा पर हमले की खबर सामने आई थी, जिससे कुछ समय के लिए गैस सप्लाई प्रभावित हुई थी। ऐसे में कतर का ये आश्वासन भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पड़ोसी देशों की भी मदद कर रहा भारत
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वो अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ पड़ोसी देशों की जरूरतों का भी ध्यान रख रही है। हाल ही में भारत ने श्रीलंका को 38 मीट्रिक टन पेट्रोलियम उत्पाद की आपूर्ति की है, जबकि मॉरिशस के साथ भी तेल और गैस सप्लाई को लेकर समझौते को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

ऊर्जा क्षेत्र में भारत की मजबूती
वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत की ऊर्जा व्यवस्था मजबूत बनी हुई है। देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता 531 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है, जिसमें कोयला, नवीकरणीय ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा का महत्वपूर्ण योगदान है। खास बात ये है कि गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है।

सरकार आने वाले महीनों में कई नई ऊर्जा परियोजनाओं को तेजी से शुरू करने की योजना बना रही है, जिससे देश की ऊर्जा जरूरतों को और मजबूती मिलेगी।

कतर का भारत के प्रति भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार बने रहने का आश्वासन ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और अस्थिरता का माहौल है। ये समझौता न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों को भी नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

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