पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच अहम शांति वार्ता शुरू होने जा रही है, लेकिन इससे पहले ईरान ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल जब इस्लामाबाद के लिए रवाना हुआ, तो विमान की सीटों पर यात्रियों की जगह मिनाब हमले में मारे गए 168 स्कूली बच्चों की तस्वीरें, उनके खून से सने स्कूल बैग, जूते और सफेद फूल रखे गए थे। ये कदम ईरान की ओर से एक प्रतीकात्मक विरोध के रूप में देखा जा रहा है।
इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ कर रहे हैं। उन्होंने विमान के अंदर की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते हुए “मेरे इस उड़ान के साथी” (#Minab168) लिखा, जो काफी भावुक और चर्चा का विषय बन गया।
मिनाब हमले की पृष्ठभूमि
ये पूरा घटनाक्रम 28 फरवरी को ईरान के मिनाब में एक प्राथमिक स्कूल पर हुए हमले से जुड़ा है, जिसमें बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों की मौत हो गई थी। ईरान इस हमले के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराता है। इस घटना में 165 से 168 लोगों की जान गई थी, जिनमें अधिकतर बच्चे और स्कूल स्टाफ शामिल थे, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
ईरान ने अपने प्रतिनिधिमंडल को ही “मिनाब 168” नाम दिया है, जिससे ये साफ संकेत मिलता है कि वो इस मुद्दे को शांति वार्ता के दौरान प्रमुखता से उठाना चाहता है।
همراهان من در این پرواز#Minab168 pic.twitter.com/xvXmDlSDiF
— محمدباقر قالیباف | MB Ghalibaf (@mb_ghalibaf) April 10, 2026
शांति वार्ता से पहले कड़ा संदेश
ईरान के इस कदम को एक मजबूत कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। गालिबाफ ने स्पष्ट किया है कि शांति वार्ता के दौरान मिनाब के मासूम बच्चों को भुलाया नहीं जा सकता। ये कदम न केवल विरोध दर्ज कराने के लिए है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस घटना की ओर आकर्षित करने के लिए भी उठाया गया है।
अमेरिका-ईरान वार्ता और चुनौतियां
इस्लामाबाद में हो रही ये वार्ता अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के लगभग 40 दिन बाद पहली उच्च-स्तरीय बातचीत है। अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं।
हालांकि, इस वार्ता के सामने कई चुनौतियां भी हैं। दक्षिणी लेबनान क्षेत्र में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव जारी है, जिससे स्थिति और जटिल बनी हुई है।
ईरान की शर्तें
ईरान ने वार्ता शुरू होने से पहले कुछ अहम शर्तें भी रखी हैं। इनमें लेबनान में इजरायली हमलों को रोकना और ईरान की ब्लॉक की गई संपत्तियों को रिहा करना शामिल है। ईरान का कहना है कि इन शर्तों के बिना सार्थक बातचीत संभव नहीं होगी।
ईरान का ये प्रतीकात्मक कदम केवल एक विरोध नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर एक मजबूत संदेश है। इस्लामाबाद में शुरू हो रही शांति वार्ता अब सिर्फ कूटनीतिक बातचीत नहीं, बल्कि भावनात्मक और राजनीतिक दबाव के बीच होने वाली अहम प्रक्रिया बन गई है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।
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