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RBI का बड़ा फैसला: विदेशी ऑटो-पेमेंट पर अब 24 घंटे पहले अलर्ट, यूजर को मिलेगा पूरा कंट्रोल

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम को और सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए ई-मेंडेट (e-Mandate) नियमों में अहम बदलाव किए हैं। नए नियमों के तहत अब विदेशी कंपनियों को किए जाने वाले ऑटोमैटिक पेमेंट पर यूजर्स को पहले से जानकारी मिलेगी और वे चाहें तो इसे रोक भी सकेंगे।

24 घंटे पहले मिलेगा नोटिफिकेशन

अब अगर आप नेटफ्लिक्स, यूट्यूब जैसी विदेशी सेवाओं के लिए ऑटो-पेमेंट सेट करते हैं, तो हर ट्रांजैक्शन से 24 घंटे पहले आपको नोटिफिकेशन भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया में एडिशनल फैक्टर ऑथेंटिकेशन (AFA) यानी OTP के जरिए वेरिफिकेशन भी जरूरी होगा। इससे यूजर्स को समय रहते भुगतान को रद्द करने का विकल्प मिलेगा।

ट्रांजैक्शन लिमिट और नियम

RBI ने ई-मेंडेट ट्रांजैक्शन के लिए स्पष्ट लिमिट तय की है:

  • ₹15,000 तक के ट्रांजैक्शन बिना अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन के पूरे किए जा सकते हैं।
  • ₹1 लाख तक की लिमिट क्रेडिट कार्ड बिल, इंश्योरेंस प्रीमियम और म्यूचुअल फंड निवेश जैसे भुगतानों के लिए लागू होगी।
  • इससे अधिक राशि पर अतिरिक्त वेरिफिकेशन जरूरी होगा।

यूजर अपनी सुविधा के अनुसार फिक्स्ड अमाउंट या अधिकतम लिमिट भी तय कर सकते हैं।

बदलाव या रद्द करने पर भी वेरिफिकेशन जरूरी

अगर आप ई-मेंडेट में कोई बदलाव करते हैं या उसे बंद करना चाहते हैं, तो बैंक को दोबारा वेरिफिकेशन करना अनिवार्य होगा। इससे अनधिकृत बदलाव की संभावना कम होगी।

गलत ट्रांजैक्शन पर मिलेगा पूरा रिफंड

RBI ने ग्राहकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारी के नियम भी स्पष्ट किए हैं:

  • जीरो लायबिलिटी: अगर बैंक की गलती हो या 3 कार्यदिवस के भीतर शिकायत दर्ज की जाए, तो ग्राहक को पूरा रिफंड मिलेगा।
  • लिमिटेड लायबिलिटी: 4 से 7 दिन में शिकायत करने पर कुछ सीमा तक ग्राहक की जिम्मेदारी तय होगी।
  • 7 दिन बाद की शिकायत पर बैंक की नीति लागू होगी।

कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं

RBI ने ये भी स्पष्ट किया है कि ई-मेंडेट सुविधा देने के लिए बैंक ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूल सकते। साथ ही, कार्ड के रिन्यू होने पर पुराने ई-मेंडेट नए कार्ड से लिंक किए जा सकेंगे।

यूजर्स के लिए क्या है फायदा

इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य डिजिटल फ्रॉड को रोकना और यूजर्स को उनके खर्चों पर बेहतर नियंत्रण देना है। अब ग्राहक बिना चिंता के ऑटो-पेमेंट सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई भी कर पाएंगे। कुल मिलाकर, RBI का ये कदम डिजिटल पेमेंट सिस्टम को और सुरक्षित, पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।

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