भगोड़े कारोबारी विजय माल्या (Vijay Mallya) से जुड़े एक पुराने मामले में नया घटनाक्रम सामने आया है। करीब दो दशकों से उनकी ओर से पैरवी कर रही कानूनी फर्म ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले से खुद को अलग करने की अनुमति मांगी है। वकीलों का कहना है कि लंबे समय से विजय माल्या से उनका कोई संपर्क नहीं हो पाया है और उन्हें केस को आगे बढ़ाने के लिए कोई निर्देश भी नहीं मिल रहे हैं।
कोर्ट में क्या कहा गया?
दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान विजय माल्या (Vijay Mallya) की ओर से पेश होने वाली लॉ फर्म ने बताया कि वो वर्ष 2004 से इस मामले में उनकी पैरवी कर रही है। हालांकि अब काफी समय से माल्या से किसी भी प्रकार का संवाद नहीं हो पाया है। ऐसे में बिना निर्देशों के मुकदमे की प्रभावी पैरवी संभव नहीं है, इसलिए अदालत से केस से हटने की अनुमति मांगी गई है।
प्रवर्तन निदेशालय ने जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मांग का विरोध किया। एजेंसी का कहना है कि वकीलों को केस से हटने की अनुमति देने से पहले विजय माल्या को इसकी जानकारी देना आवश्यक है। ईडी का तर्क है कि अदालत को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि संबंधित पक्ष को वकीलों के इस फैसले की सूचना मिले, ताकि कानूनी प्रक्रिया प्रभावित न हो।
अब अदालत के सामने क्या सवाल?
दिल्ली हाई कोर्ट को अब ये तय करना है कि क्या किसी वकील या लॉ फर्म को ऐसे मामले से हटने की अनुमति दी जा सकती है, जिसमें उनका मुवक्किल लंबे समय से संपर्क में न हो। साथ ही अदालत इस पहलू पर भी विचार करेगी कि भगोड़े घोषित व्यक्ति को पहले इसकी औपचारिक सूचना देना आवश्यक है या नहीं।
कौन हैं विजय माल्या?
विजय माल्या (Vijay Mallya) भारत के चर्चित कारोबारी रहे हैं और उन पर बैंक ऋण धोखाधड़ी तथा मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कई मामलों की जांच चल रही है। वर्ष 2016 में भारत छोड़ने के बाद वो ब्रिटेन में रह रहे हैं। भारतीय एजेंसियां लंबे समय से उनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया चला रही हैं और उनसे जुड़े कई मामलों की सुनवाई विभिन्न अदालतों में जारी है।






















