नेपाल के रसुवा इलाके में आई भीषण अचानक बाढ़ के पीछे की घटनाओं को समझने में ISRO के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) के सैटेलाइट विश्लेषण से महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। शुरुआती आकलन के मुताबिक, ये आपदा तिब्बत के ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र से शुरू हुई हो सकती है।
भूकंप के बाद ग्लेशियर ढहने का अनुमान
NRSC के शुरुआती विश्लेषण के अनुसार, 4.9 तीव्रता के भूकंप के बाद सर्क ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिरा होगा। इसके साथ बड़ी मात्रा में बर्फ और चट्टानों का मलबा पहाड़ी घाटी में तेजी से नीचे आया।
इस मलबे ने कुछ समय के लिए नदी का रास्ता रोक दिया। इसके बाद जब यह प्राकृतिक अवरोध टूटा तो पानी, बर्फ, चट्टानों और कीचड़ का तेज बहाव नीचे की ओर आया, जिससे त्रिशूली नदी प्रणाली में अचानक बाढ़ फैल गई।
ISRO ने सैटेलाइट तस्वीरों से की तुलना
NRSC के वैज्ञानिकों ने आपदा से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन किया। इसके लिए 24 अगस्त की Sentinel-2 तस्वीरों की तुलना 26 अगस्त की Resourcesat-2A तस्वीरों से की गई। इसके अलावा अप्रैल 2026 की पुरानी तस्वीरों से भी इलाके में हुए बदलावों का मिलान किया गया।
तस्वीरों में नदी के रास्ते में बदलाव, बड़े पैमाने पर मलबे का जमाव और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान हुई।
4.9 तीव्रता का भूकंप भी आया था
भारत के National Centre for Seismology (NCS) के अनुसार, सुबह करीब 8:22 बजे 4.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। भूकंप करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर आया था। हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है।
कैसे बनी बाढ़ की विनाशकारी लहर?
शुरुआती घटनाक्रम को इस तरह समझा जा सकता है:
भूकंप → ग्लेशियर का हिस्सा ढहा → बर्फ और चट्टानों का मलबा नीचे आया → नदी का रास्ता अस्थायी रूप से रुका → पानी जमा हुआ → अवरोध टूटा → पानी और मलबे का तेज बहाव → अचानक बाढ़।
हालांकि, ये प्रारंभिक सैटेलाइट-आधारित आकलन है। आपदा के अंतिम कारणों की पुष्टि के लिए आगे विस्तृत वैज्ञानिक और जमीनी जांच जरूरी होगी।
आपदा प्रबंधन में सैटेलाइट तकनीक अहम
इस घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी आपदाओं में सैटेलाइट तकनीक कितनी उपयोगी हो सकती है। आपदा से पहले और बाद की तस्वीरों की तुलना करके प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, नदी के मार्ग में बदलाव और मलबे के फैलाव का तेजी से आकलन किया जा सकता है।
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