Nepal Flood News: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। हजारों लोग प्रभावित हैं और राहत-बचाव अभियान लगातार जारी है। नेपाल के अधिकारियों के अनुसार, अब तक 900 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। आंकड़े लगातार अपडेट किए जा रहे हैं।
20 हजार सुरक्षाकर्मी रेस्क्यू में जुटे
नेपाल में सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के करीब 20 हजार जवान राहत एवं बचाव अभियान में लगाए गए हैं। अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। कई इलाकों में सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत सामग्री पहुंचाने में काफी मुश्किलें आ रही हैं।
बाढ़ से प्रभावित हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। करीब 933 लापता लोगों का संबंध जलविद्युत परियोजनाओं से बताया गया है, जिसके चलते सुरंगों में विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
149 भारतीय नागरिकों को बचाया गया
भारत ने नेपाल में फंसे अपने नागरिकों की मदद के लिए राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 149 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
भारत की ओर से नेपाल को राहत सामग्री की चौथी खेप भी भेजी गई है। इसमें टनल रेस्क्यू उपकरण, तकनीकी टीम, DNA जांच के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञ और जरूरी राहत सामग्री शामिल है।
DNA जांच में मदद करेगी भारतीय टीम
नेपाल में बड़ी संख्या में ऐसे शव भी मिले हैं जिनकी पहचान अभी नहीं हो सकी है। इन्हें अलग-अलग अस्पतालों में सुरक्षित रखा गया है। पीड़ितों की पहचान में मदद के लिए भारतीय फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम नेपाल में काम कर रही है और DNA सैंपल के विश्लेषण में नेपाली अधिकारियों की सहायता कर रही है।
हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश जारी
सबसे चुनौतीपूर्ण बचाव अभियानों में से एक जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को बाहर निकालना है। मलबे, खराब मौसम और क्षतिग्रस्त रास्तों के कारण रेस्क्यू टीमों को लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। भारत और अन्य देशों के विशेषज्ञ भी सुरंग बचाव अभियान में सहयोग कर रहे हैं।
गौरतलब है कि, नेपाल में राहत और बचाव अभियान युद्ध स्तर पर जारी है। प्रशासन की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, सुरंगों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित इलाकों तक भोजन, दवाएं और जरूरी सामान पहुंचाना है।
ये भी पढ़ें: संकट की घड़ी में भारत-नेपाल साथ, जानें भारत ने कैसे की मदद

























