महाराष्ट्र

महाराष्ट्र की राजनीति में ‘CDR’ धमाका: अंजलि दमानिया के सनसनीखेज खुलासे से हड़कंप, क्या ज्योतिषी खरात के बहाने सत्ताधारियों को घेरने की तैयारी?

अंजलि दमानिया
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महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के जिन्न ने प्रवेश कर लिया है। सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया द्वारा कथित ज्योतिषी अशोक खरातमामले में किए गए खुलासों ने सत्ता के गलियारों में खलबली मचा दी है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और राकांपा (अजित गुट) की नेता रूपाली चाकणकर के नाम इस विवाद में घसीटे जाने के बाद, अब यह मामला केवल एक ज्योतिषी की जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्राइवेसी और राजनीतिक जासूसी के बड़े विवाद में बदल गया है।

क्या है पूरा विवाद?
विवाद की जड़ में है कथित ज्योतिषी अशोक खरात, जिन पर कई गंभीर आरोप लगे हैं। लेकिन इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब अंजलि दमानिया ने दावा किया कि उनके पास खरात की सीडीआर (CDR) मौजूद है। दमानिया के मुताबिक, इन रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और रूपाली चाकणकरकी खरात से कई बार फोन पर बातचीत हुई थी।

दमानिया के मुख्य दावे:
उन्हें यह गोपनीय सीडीआर किसी ‘अज्ञात व्यक्ति’ ने उपलब्ध कराई है।
रिकॉर्ड्स में सत्ताधारी नेताओं और खरात के बीच निरंतर संवाद के प्रमाण हैं।
जैसे ही उन्हें यह संवेदनशील जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत इसकी सूचना राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP)को दी।

अज्ञात ‘सोर्स’ पर उठते सवाल
दमानिया का यह कहना कि उन्हें सीडीआर किसी अज्ञात व्यक्ति ने दी है, कानूनन एक पेचीदा मामला बनता जा रहा है। आमतौर पर कॉल डिटेल रिकॉर्ड केवल पुलिस या अधिकृत जांच एजेंसियां ही निकाल सकती हैं। ऐसे में एक निजी व्यक्ति के पास ये रिकॉर्ड्स पहुंचना सुरक्षा और गोपनीयता के उल्लंघन का बड़ा मुद्दा है।

विपक्ष इसे जहां सरकार की घेराबंदी के लिए इस्तेमाल कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे दमानिया की छवि बिगाड़ने की साजिश करार दे रहा है।

नेताओं की प्रतिक्रिया और बचाव
मुख्यमंत्री कार्यालय और रूपाली चाकणकर की ओर से इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया आने की उम्मीद है। सत्ताधारी गुट का तर्क है कि एक सार्वजनिक जीवन जीने वाले व्यक्ति के पास कई लोग अपनी समस्याएं लेकर आते हैं, और किसी के फोन करने मात्र से उसे अपराध से नहीं जोड़ा जा सकता।

पुलिस की भूमिका और कानूनी पेच
दमानिया ने डीजीपी को जानकारी देकर गेंद अब पुलिस के पाले में डाल दी है। अब जांच का विषय यह है कि:
1. क्या वास्तव में यह सीडीआर आधिकारिक है या इसके साथ छेड़छाड़ की गई है?
2. किस अधिकारी या विभाग ने अवैध रूप से सीडीआर लीक की?
3. क्या अशोक खरात के साथ हुए संवाद का स्वरूप केवल ज्योतिषीय था या इसके पीछे कोई आपराधिक साठगांठ है?

आगे क्या?
महाराष्ट्र की राजनीति में ‘सीडीआर वॉर’ पुराना रहा है, लेकिन अंजलि दमानिया के इस नए वार ने सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है। यदि दमानिया के दावे सही साबित होते हैं, तो शिंदे सरकार के लिए यह बड़ी नैतिक चुनौती होगी। वहीं, यदि ये दावे निराधार निकले, तो दमानिया खुद कानूनी मुश्किलों में फंस सकती हैं।

फिलहाल, अशोक खरात मामलाअब ज्योतिष और भविष्यवाणियों से निकलकर ‘डेटा लीक’ और ‘पॉलिटिकल माइलेज’ की जंग बन चुका है।
जब गोपनीय दस्तावेज सड़कों पर आने लगें, तो समझ लीजिए कि सत्ता के गलियारों में गहरी सेंध लग चुकी है।

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