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Digital Strike: आतंकवाद पर भारत का अंतिम ‘PRAHAR’, जीरो टॉलरेंस और डिजिटल स्ट्राइक के साथ नई राष्ट्रीय नीति का शंखनाद

Digital Strike
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Digital Strike: आतंकवाद के बदलते स्वरूप और उभरते वैश्विक खतरों के बीच भारत ने अपनी सुरक्षा रणनीति को नई धार दी है। गृह मंत्रालय ने आतंकवाद के खिलाफ जंग में एक युगांतकारी कदम उठाते हुए नई राष्ट्रीय नीति ‘प्रहार’ (PRAHAR) लॉन्च की है। यह नीति न केवल सीमाओं पर चौकसी बढ़ाती है, बल्कि आधुनिक युग के डिजिटल आतंकवाद और वित्तीय अपराधों पर भी सीधा प्रहार करती है।

क्या है ‘प्रहार’ (PRAHAR)?
‘प्रहार’ का अर्थ है— Prevention, Response, and Halting Approach to Anti-Terrorism (आतंकवाद विरोधी निवारण, प्रतिक्रिया और रोकथाम दृष्टिकोण)। यह रणनीति इस सिद्धांत पर आधारित है कि आतंकवाद का मुकाबला केवल गोलियों से नहीं, बल्कि एक व्यापक तंत्र (Ecosystem) के जरिए किया जाना चाहिए।

डिजिटल खतरे अब ‘आतंक’ की श्रेणी में
इस नीति की सबसे क्रांतिकारी विशेषता यह है कि इसमें पहली बार साइबर हमलों और आपराधिक हैकिंग को पारंपरिक आतंकवाद के समान ही खतरनाक माना गया है।

  • साइबर वॉरफेयर: भारत के क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर (बिजली ग्रिड, बैंकिंग, संचार) को निशाना बनाने वाले डिजिटल हमलों को आतंकी कृत्य माना जाएगा।
  • नई तकनीक पर लगाम: नीति में डार्क वेब (Dark Web), क्रिप्टो वॉलेट और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए होने वाले आतंकी वित्तपोषण (Terror Funding) से निपटने के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है।

आतंकवाद का कोई धर्म नहीं: ‘प्रहार’ का मूल दर्शन
भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए ‘प्रहार’ में साफ कहा है कि वह आतंकवाद को किसी विशेष संप्रदाय, जातीयता, राष्ट्रीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ता। सरकार का उद्देश्य केवल अपराधी और उसकी विचारधारा को जड़ से मिटाना है।

‘प्रहार’ के 7 मजबूत स्तंभ (Seven Pillars)
इस नीति को प्रभावी बनाने के लिए 7 प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है:

  1. रोकथाम (Prevention): खुफिया तंत्र को इतना मजबूत करना कि हमला होने से पहले ही उसे विफल किया जा सके।
  2. त्वरित प्रतिक्रिया (Response): हमले की स्थिति में सुरक्षा बलों की ओर से ‘बिना देरी’ के जवाबी कार्रवाई।
  3. जीरो टॉलरेंस: आतंकियों और उनके मददगारों के खिलाफ कोई सहानुभूति नहीं।
  4. अंतरराष्ट्रीय सहयोग: मित्र राष्ट्रों के साथ मिलकर आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों को नष्ट करना।
  5. क्षमता वर्धन: राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की एटीएस (ATS) इकाइयों को आधुनिक हथियारों और तकनीक से लैस करना।
  6. वित्तीय घेराबंदी: आतंकी फंडिंग के हर छोटे-बड़े स्रोत (जैसे क्रिप्टो) को ब्लॉक करना।
  7. समाज की भागीदारी: सुरक्षा बल और नागरिक समाज मिलकर एक मजबूत कवच तैयार करेंगे।

राज्यों को मिलेगी नई शक्ति
‘प्रहार’ के तहत केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष फंड और प्रशिक्षण मुहैया कराएगी। इससे स्थानीय पुलिस और आतंकी रोधी इकाइयां (Anti-Terror Units) अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग कर पाएंगी, जिससे देश के आंतरिक हिस्सों में छिपे ‘स्लीपर सेल्स’ को खत्म करना आसान होगा।

प्रहार’ केवल एक कागजी दस्तावेज नहीं, बल्कि 21वीं सदी के भारत की वह प्रतिज्ञा है जो यह स्पष्ट करती है कि भारत अब केवल हमले का इंतजार नहीं करेगा, बल्कि दुश्मन के हर कदम—चाहे वह सीमा पर हो या साइबर स्पेस मेंउसका मुंहतोड़ जवाब देगा।

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