पाकिस्तान के एयरस्पेस पर जारी प्रतिबंध के बीच भारत अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए वैकल्पिक हवाई रास्तों की संभावनाएं तलाश रहा है। इसी कड़ी में चीन के शिनजियांग क्षेत्र के ऊपर से एयर रूट इस्तेमाल करने की संभावना पर भारत और चीन के बीच बातचीत चलने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, अभी यह कोई मंजूर या नियमित हवाई मार्ग नहीं है और बातचीत के स्तर पर ही है।
पाकिस्तान की ओर से भारतीय विमानों के लिए एयरस्पेस प्रतिबंध को हाल ही में 24 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाया गया है। इस वजह से भारत से यूरोप और उत्तरी अमेरिका की ओर जाने वाली कुछ लंबी दूरी की उड़ानों को पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से बचकर वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है।
शिनजियांग के ऊपर से एयर रूट पर क्या हो रही है बातचीत?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, भारतीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि विदेश मंत्रालय चीन के साथ इस मुद्दे पर संपर्क में है। बातचीत एक साल से ज्यादा समय से चलने की बात कही गई है।
प्रस्तावित विकल्प में चीन के शिनजियांग क्षेत्र के ऊपर से गुजरने वाले हवाई मार्ग का इस्तेमाल शामिल है। अगर दोनों देशों के बीच इस व्यवस्था पर सहमति बनती है और जरूरी तकनीकी व सुरक्षा मंजूरियां मिलती हैं, तो कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए यह पाकिस्तान से बचने का वैकल्पिक रास्ता बन सकता है।
पाकिस्तान का एयरस्पेस क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत से यूरोप और उत्तरी अमेरिका की ओर जाने वाली कई उड़ानों के लिए पाकिस्तान का भौगोलिक स्थान महत्वपूर्ण है। जब भारतीय विमान वहां से होकर नहीं गुजर सकते, तो उन्हें दूसरे रास्तों से जाना पड़ता है।
इससे कुछ उड़ानों की यात्रा दूरी और समय बढ़ सकता है, जिसके साथ ईंधन की खपत और परिचालन लागत पर भी असर पड़ सकता है। लंबी उड़ानों में अतिरिक्त उड़ान समय का असर विमान के क्रू शेड्यूल और ऑपरेशनल प्लानिंग पर भी पड़ता है।
अप्रैल 2025 से लागू है एयरस्पेस प्रतिबंध
भारत और पाकिस्तान के बीच एयरस्पेस प्रतिबंध की शुरुआत अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के बीच हुई थी। पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद किया, जबकि भारत ने भी पाकिस्तानी विमानों के लिए अपने एयरस्पेस पर प्रतिबंध लगाया।
सितंबर 2026 में पाकिस्तान ने भारतीय पंजीकृत विमानों और भारतीय एयरलाइंस द्वारा संचालित या लीज पर लिए गए विमानों के लिए प्रतिबंध को 24 अक्टूबर तक बढ़ाने का नोटम जारी किया।
किन उड़ानों पर ज्यादा असर?
पाकिस्तानी एयरस्पेस से बचने का असर खास तौर पर उन लंबी दूरी की उड़ानों पर पड़ता है जिनका रूट भारत से यूरोप, उत्तरी अमेरिका और कुछ अन्य पश्चिमी गंतव्यों की ओर जाता है।
वैकल्पिक रूट अपनाने पर विमानों को पाकिस्तान के बजाय अरब सागर, मध्य एशिया या अन्य हवाई क्षेत्रों की ओर से लंबा रास्ता लेना पड़ सकता है। इससे रूट के अनुसार उड़ान समय और ईंधन जरूरत में बदलाव हो सकता है।
एयर इंडिया के लिए भी अहम है वैकल्पिक रास्ता
पाकिस्तानी एयरस्पेस प्रतिबंध का असर भारतीय एयरलाइंस पर पड़ा है। Reuters ने पहले रिपोर्ट किया था कि Air India ने चीन के शिनजियांग के ऊपर से एयरस्पेस इस्तेमाल करने की संभावना को लेकर भारत सरकार के सामने मामला उठाया था, ताकि पाकिस्तान से बचते हुए कुछ अंतरराष्ट्रीय रूट छोटे किए जा सकें।
अब सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, भारत सरकार भी चीन के साथ संभावित एयर रूट को लेकर बातचीत कर रही है।
क्या चीन के रास्ते से उड़ानें तुरंत शुरू हो जाएंगी?
नहीं। फिलहाल इसे संभावित विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। किसी नए अंतरराष्ट्रीय एयर रूट के इस्तेमाल के लिए संबंधित देशों के बीच सहमति, एयर ट्रैफिक व्यवस्था, सुरक्षा से जुड़े प्रबंध और अन्य तकनीकी मंजूरियां जरूरी होती हैं।
भारत और चीन के बीच हवाई संपर्क को लेकर पहले से द्विपक्षीय व्यवस्था मौजूद है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद भारत-चीन के बीच सीधी उड़ान सेवाएं दोबारा शुरू हुई थीं।
इसलिए शिनजियांग के ऊपर से नया रूट तैयार होने की स्थिति में भी उसे लागू करने से पहले कई स्तरों पर प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
भारत के लिए क्यों अहम है नया विकल्प?
अगर चीन के साथ प्रस्तावित रूट पर सहमति बनती है, तो भारत के पास पाकिस्तान के एयरस्पेस पर निर्भरता कम करने के लिए एक और विकल्प हो सकता है। इससे कुछ लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय रूटों की दूरी और उड़ान समय कम करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चीन के शिनजियांग के ऊपर से संभावित एयर रूट को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन अभी इसे अंतिम रूप से मंजूर एयर कॉरिडोर नहीं कहा जा सकता।
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