Palestine state recognition: दुनिया में फिलिस्तीन को एक आजाद राज्य मानने की होड़ लग गई है। गाजा पर इजरायल के हमलों के बीच ये कदम तेज हो गया है। सितंबर 2025 में ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और पुर्तगाल ने फिलिस्तीन को मान्यता दे दी। इसके बाद फ्रांस, बेल्जियम, लक्जमबर्ग, माल्टा और अंडोरा जैसे देशों ने भी हां कहा। अब कुल 157 संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश फिलिस्तीन को राज्य मानते हैं। ये आंकड़ा यूएन के 193 सदस्यों का 81 फीसदी है। लेकिन सवाल ये है कि क्या फिलिस्तीन राज्य मान्यता के लिए कोई सर्टिफिकेट मिलता है? आइए, इसकी कहानी आसान शब्दों में समझें।
फिलिस्तीन का मामला जटिल है। कानूनी तौर पर ये एक राज्य है, लेकिन नक्शे पर पूरी तरह आजाद नहीं। 1988 में फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन ने आजादी की घोषणा की थी। तब से 80 से ज्यादा देशों ने समर्थन दिया। आज फिलिस्तीन के विदेशों में राजनयिक दूतावास हैं। ये ओलंपिक जैसे वैश्विक आयोजनों में हिस्सा लेता है। लेकिन फिलिस्तीन की कोई साफ सीमा, राजधानी या स्थायी सेना नहीं है। 2012 से ये यूएन में गैर-सदस्य पर्यवेक्षक राज्य है। गाजा मानवीय संकट ने इस मुद्दे को और गर्म कर दिया है।
गाजा में हालात खराब हैं। हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 23 महीनों में इजरायली हमलों से 68,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए हैं। इनमें ज्यादातर महिलाएं, बच्चे और बूढ़े हैं। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि गाजा में भुखमरी फैल रही है। इजरायल पर नरसंहार का आरोप लगा है। ये सब देखकर दुनिया के देश फिलिस्तीन को मान्यता देकर दो-राज्य समाधान की तरफ बढ़ रहे हैं। ब्रिटेन ने सबसे पहले कदम उठाया। ब्रिटेन ने ही 1948 में इजरायल बनाया था और फिलिस्तीनियों को बेघर किया था। अब ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने कहा कि ये शांति के लिए जरूरी है।
कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने कहा कि फिलिस्तीन को मान्यता देना जरूरी है, वरना दो-राज्य समाधान खत्म हो जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बानीज ने फिलिस्तीनियों की पुरानी ख्वाहिश को सलाम किया। पुर्तगाल ने भी कहा कि ये शांति का रास्ता है। 21 सितंबर को यूएन में फ्रांस-सऊदी अरब के सम्मेलन में ये घोषणाएं हुईं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि फिलिस्तीन को राज्य मानना हमारा ऐतिहासिक वादा है। बेल्जियम, लक्जमबर्ग, माल्टा और अंडोरा ने भी साथ दिया। 2025 में 11 नए देश शामिल हुए, जैसे मेक्सिको, आर्मेनिया, स्लोवेनिया, आयरलैंड, नॉर्वे, स्पेन, बहामास, त्रिनिदाद और टोबैगो, जमैका, बारबाडोस।
इजरायल इससे नाराज है। पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ये 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले को इनाम देना है। अमेरिका ने इसे नकारा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप विरोधी हैं। लेकिन यूरोपीय और अरब देश फिलिस्तीन के साथ खड़े हो रहे। फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इन देशों का शुक्रिया अदा किया।
फिलिस्तीन राज्य मान्यता कैसे दी जाती है? ये कोई कागजी कार्रवाई नहीं। कोई सर्टिफिकेट या दस्तावेज नहीं मिलता। ये राजनीतिक फैसला है। देश घोषणा करते हैं या बयान जारी करते हैं। फिर राजनयिक रिश्ते बनते हैं। दूतावास खुलते हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ये मान्यता de facto या de jure हो सकती है। लेकिन कोई भौतिक प्रमाण-पत्र नहीं। ये सिर्फ बयान या नोट से होता है। दो-राज्य समाधान को मजबूत करने के लिए ये कदम उठाया जा रहा है। गाजा में शांति के लिए दबाव बढ़ रहा है।
#PalestineRecognition #GazaCrisis #TwoStateSolution #IsraelPalestine #UN2025
ये भी पढ़ें: महाराष्ट्र: कैब यात्रियों पर महंगाई की मार: हैचबैक से SUV तक बढ़े रेट्स





















