PM Modi Israel visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बुधवार से इजराइल की दो दिवसीय ऐतिहासिक यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। 9 वर्षों के अंतराल के बाद हो रहा यह उनका दूसरा इजराइल दौरा है, जो भारत और इजराइल के बीच अटूट होते रिश्तों की गवाही देता है। रक्षा, तकनीक और कूटनीति के त्रिकोण पर टिकी यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि भारत की सुरक्षा प्रणाली में एक नए अध्याय का सूत्रपात भी कर सकती है।
दौरे का मुख्य एजेंडा: संसद का संबोधन और शिखर वार्ता
प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम अत्यंत व्यस्त और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है:
- संसद (Knesset) का संबोधन: पीएम मोदी इजराइल की संसद को संबोधित करेंगे, जहाँ वे विश्व शांति और आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई का रोडमैप रख सकते हैं।
- शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात: प्रधानमंत्री वहां के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग और अपने ‘मित्र’ प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ गहन चर्चा करेंगे।
- प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता: दोनों देशों के बीच व्यापार, कृषि और जल संरक्षण जैसे विषयों पर समझौते होंगे, लेकिन सबका केंद्र ‘रक्षा सहयोग’ ही रहेगा।
🎥 As PM @narendramodi is enroute to Israel watch highlights of the deep and long-standing strategic partnership between 🇮🇳 – 🇮🇱 pic.twitter.com/T7gRXsq7nz
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) February 25, 2026
रक्षा सहयोग: भारत को मिलेगा ‘आयरन डोम’ का साथ?
इस यात्रा का सबसे चर्चित पहलू भारत के रक्षा कवच को अभेद्य बनाना है। सूत्रों के अनुसार, रक्षा सहयोग वार्ता में निम्नलिखित बिंदु शीर्ष पर रहेंगे:
- आयरन डोम (Iron Dome) तकनीक: भारत अपने स्वदेशी वायु रक्षा कवच (Air Defence Shield) को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इजराइल की विश्व प्रसिद्ध ‘आयरन डोम’ प्रणाली से तकनीकी सहयोग ले सकता है। यह प्रणाली छोटे रॉकेटों और मोर्टार हमलों को हवा में ही नष्ट करने में माहिर है।
- ड्रोन और सर्विलांस: सीमा पर निगरानी के लिए अत्याधुनिक ड्रोन्स और रडार तकनीक पर बड़े सौदे की उम्मीद है।
- मेक इन इंडिया: इजराइली रक्षा कंपनियों के साथ मिलकर भारत में ही आधुनिक हथियारों के निर्माण पर सहमति बन सकती है।
मोदी-नेतन्याहू केमिस्ट्री: बदलते वैश्विक समीकरण
क्षेत्र सहयोग की दिशा
| क्षेत्र (Sector) | पहल (Initiative) | उद्देश्य / विवरण (Objective / Details) |
|---|---|---|
| सुरक्षा (Security) | आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ और इंटेलिजेंस शेयरिंग | क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत करना और आतंकवादी गतिविधियों पर नियंत्रण |
| कृषि (Agriculture) | रेगिस्तानी इलाकों में खेती के लिए ‘ड्रिप इरिगेशन’ तकनीक का विस्तार | पानी की बचत के साथ रेगिस्तानी क्षेत्रों में कृषि उत्पादन बढ़ाना |
| इनोवेशन (Innovation) | भारतीय स्टार्टअप्स और इजराइली टेक फर्मों के बीच ‘सेमीकंडक्टर’ पर समझौता | तकनीकी सहयोग और उच्च गुणवत्ता वाले सेमीकंडक्टर समाधान का विकास |
9 साल बाद दौरे के मायने
पिछली बार जब पीएम मोदी इजराइल गए थे, तो वह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा थी। अब 9 साल बाद का यह दौरा यह दर्शाता है कि भारत ने ‘डी-हाइफनेशन’ (इजराइल और फिलिस्तीन को अलग-अलग चश्मे से देखना) की नीति को सफलतापूर्वक लागू किया है। आज भारत, इजराइल का सबसे बड़ा रक्षा खरीदार है और इजराइल, भारत का एक भरोसेमंद ‘ऑल-वेदर’ दोस्त।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत को रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर’ बनाने के साथ-साथ इजराइल की उन्नत तकनीक से जोड़ने का एक सुनहरा अवसर है। यदि ‘आयरन डोम’ जैसी तकनीक का सहयोग भारत को मिलता है, तो देश की सीमाओं पर सुरक्षा का एक ऐसा अभेद्य किला तैयार होगा जिसे भेदना किसी भी दुश्मन के लिए नामुमकिन होगा।































