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जंग की आहट और रसोई का ‘इलेक्ट्रिक’ कायाकल्प: LPG के डर से इंडक्शन की रिकॉर्ड तोड़ मांग

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पश्चिम एशिया (West Asia) में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े युद्ध ने न केवल कच्चे तेल की कीमतों में आग लगाई है, बल्कि भारत की रसोई के बजट और आदतों को भी रातों-रात बदल दिया है। होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण एलपीजी (LPG) की सप्लाई चेन पर मंडराते खतरों ने देश में ‘पैनिक बाइंग’ (घबराहट में खरीदारी) का एक नया दौर शुरू कर दिया है।

इस अनिश्चितता का सबसे बड़ा असर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर देखने को मिल रहा है, जहाँ इंडक्शन कुकटॉप्स (Electric Inductions) की मांग में सुनामी आ गई है।

1. आंकड़ों में ‘डिजिटल विस्फोट’
जंग के साये में भारतीय उपभोक्ताओं ने एलपीजी सिलेंडर के विकल्प के रूप में बिजली से चलने वाले चूल्हों को हाथों-हाथ लिया है। ई-कॉमर्स दिग्गज अमेजन (Amazon) और अन्य प्लेटफॉर्म्स से आए आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
एक दिन का रिकॉर्ड: अमेजन पर महज 24 घंटे के भीतर 1.34 लाख से अधिक इंडक्शन बिक गए।
महीने भर की बिक्री बनाम 4 दिन: जहाँ आमतौर पर पूरे महीने में 1.80 लाख इंडक्शन बिकते थे, वहीं पिछले महज 4 दिनों में 5 लाख से ज्यादा यूनिट्स की बिक्री हो चुकी है।
स्टॉक का संकट: मांग इतनी तीव्र है कि अमेजन पर सूचीबद्ध लगभग 100 कंपनियों में से 70 का स्टॉक पूरी तरह खत्म (Sold Out) हो चुका है।

2. क्यों मची है इंडक्शन खरीदने की होड़?
इस अचानक आई तेजी के पीछे तीन मुख्य मनोवैज्ञानिक और आर्थिक कारण हैं:
सप्लाई चेन का डर: होर्मुज जलमार्ग से एलपीजी टैंकरों के आने में देरी की खबरों ने लोगों के मन में सिलेंडर खत्म होने या ब्लैक होने का डर पैदा कर दिया है।
लागत का गणित: यदि कच्चे तेल और गैस की कीमतें वैश्विक बाजार में बढ़ती हैं, तो सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमतों में भी उछाल आने की संभावना है। ऐसे में इंडक्शन एक किफायती विकल्प नजर आ रहा है।
सुरक्षा और सुविधा: युद्ध की स्थिति में अनिश्चितता लंबी खिंच सकती है, इसलिए मध्यम वर्ग ने ‘प्लान-बी’ के तौर पर अपनी रसोई को इलेक्ट्रिक मोड पर शिफ्ट करना शुरू कर दिया है।

3. बाजार और कंपनियों की चुनौतियाँ
मांग में इस बेतहाशा बढ़ोतरी ने सप्लाई चेन की खामियों को भी उजागर कर दिया है।
इन्वेंटरी मैनेजमेंट: अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां इस अचानक आई मांग के लिए तैयार नहीं थीं। स्टॉक खत्म होने से अब ‘वेटिंग पीरियड’ बढ़ रहा है।
कीमतों में उछाल: स्टॉक की कमी और भारी मांग के चलते ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों बाजारों में इंडक्शन की कीमतों में 15% से 25% तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है।

4. भविष्य की राह: क्या यह बदलाव स्थायी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक अस्थायी डर नहीं है, बल्कि भारतीय रसोई के ‘एनर्जी ट्रांजिशन’ (ऊर्जा परिवर्तन) की शुरुआत हो सकती है। सरकार की ‘गो इलेक्ट्रिक’ मुहिम को जो गति सालों में नहीं मिली, उसे युद्ध के डर ने चंद दिनों में दे दी है।

शेनलॉन्ग सुएजमैक्स’ जैसे टैंकरों का भारत पहुंचना राहत की खबर जरूर है, लेकिन जनता अब केवल एक ही ईंधन (गैस) पर निर्भर रहने का जोखिम नहीं उठाना चाहती। इंडक्शन की यह रिकॉर्ड बिक्री आत्मनिर्भर रसोई की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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