श्रीनगर/जम्मू: जम्मू-कश्मीर में मानवता और चैरिटी की आड़ में चल रहे एक खतरनाक खेल का भंडाफोड़ हुआ है। ईरान के युद्ध प्रभावितों की मदद के बहाने घाटी के लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ कर करोड़ों रुपए जुटाए गए, जिसके तार अब आतंकी फंडिंग और हवाला नेटवर्क से जुड़ते दिख रहे हैं। खुफिया एजेंसियों की इस कार्रवाई ने राज्य में सक्रिय ‘सॉफ्ट सेपरेटर’ और वित्तीय अपराधियों के बीच के गठजोड़ को उजागर कर दिया है।
चैरिटी की आड़ में ‘करोड़ों का खेल’
घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब ईरानी दूतावास ने 14 मार्च को युद्ध से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए फंड की एक आधिकारिक अपील जारी की। इसी अपील का फायदा उठाकर कश्मीर में एक फर्जी नेटवर्क सक्रिय हो गया।
* वसूल की गई भारी रकम: जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क ने घाटी के विभिन्न हिस्सों से लगभग 17.91 करोड़ रुपए नकद इकट्ठा किए।
* सोना और जेवरात: नकदी के अलावा, बड़ी मात्रा में सोना, कीमती आभूषण और अन्य बहुमूल्य सामान भी दान के नाम पर वसूला गया।
* सच का खुलासा: जांच में सामने आया कि इकट्ठा किया गया यह पैसा और सामान कभी असली जरूरतमंदों तक पहुँचा ही नहीं, बल्कि इसे बीच में ही गायब कर दिया गया।
‘बरकती मॉडल’ की वापसी: आतंकी फंडिंग का शक
खुफिया एजेंसियों को सबसे बड़ी चिंता इस रकम के डायवर्जन (मार्ग परिवर्तन) को लेकर है। जांच की कड़ियाँ 2016 के उस कुख्यात ‘बरकती फंडिंग मॉडल’ से जुड़ रही हैं, जो आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद घाटी में पत्थरबाजी और आतंकी गतिविधियों को हवा देने के लिए इस्तेमाल किया गया था।
* टेरर फंडिंग का नजरिया: जांच एजेंसियां इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही हैं कि क्या इस 18 करोड़ की राशि का इस्तेमाल घाटी में अशांति फैलाने या आतंकी नेटवर्क को पुनर्जीवित करने के लिए किया जा रहा था।
* इन्फ्लुएंस नेटवर्क: शक है कि इस नेटवर्क के पीछे कुछ प्रभावशाली लोग और संगठन शामिल हैं जो विदेशी एजेंडे के तहत काम कर रहे हैं।
NIA और IB की संयुक्त जांच: हवाला लिंक पर नजर
मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया है। अब इस नेटवर्क के वित्तीय प्रवाह की जांच इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के हवाले है।
* हवाला कनेक्शन: सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि इस पैसे को सुरक्षित करने के लिए ‘हवाला’ रास्तों का उपयोग किया गया है।
* देशव्यापी अलर्ट: गृह मंत्रालय की एडवाइजरी के बाद, IB ने देशभर में उभर रहे ऐसे ‘फर्जी चैरिटी नेटवर्क’ पर हाई अलर्ट जारी किया है। यह अंदेशा जताया गया है कि दुश्मन देश और उनके गुर्गे अब चैरिटी को हथियार बनाकर भारतीय अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को चोट पहुँचाने की फिराक में हैं।
जनता के लिए चेतावनी
पुलिस और प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत व्यक्ति या संस्था को दान न दें। किसी भी अंतरराष्ट्रीय सहायता के लिए केवल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त चैनलों या आधिकारिक दूतावासों के माध्यम से ही योगदान करें।
जांच का दायरा: “यह केवल वित्तीय धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। हम उन सभी चेहरों को बेनकाब करेंगे जिन्होंने धर्म और संवेदनाओं की आड़ में यह जाल बिछाया है।






























