तेहरान/वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया (Middle East) में संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ से वापसी की राहें धुंधली होती दिख रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘जमीनी जंग’ के कड़े रुख के जवाब में ईरान ने अपनी सैन्य शक्ति का अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए 10 लाख सैनिकों की विशाल फौज लामबंद कर दी है। ट्रंप द्वारा खाड़ी देशों में 10 हजार अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों की तैनाती के ऐलान के बाद ईरान ने अपनी सक्रिय सैन्य क्षमता (6 लाख) को युद्ध स्तर पर बढ़ा दिया है।
हूतियों की धमकी: निशाने पर अमेरिकी सैन्य अड्डे
ईरान की इस तैयारी को यमन के हूती विद्रोहियों का भी खुला समर्थन मिला है। हूतियों ने चेतावनी दी है कि पूर्वी अफ्रीका में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने अब उनके रॉकेट और ड्रोनों के सीधे निशाने पर हैं। यह बयान इस युद्ध के दायरे को खाड़ी देशों से निकालकर अफ्रीका महाद्वीप तक फैलाने का संकेत दे रहा है।
इजरायल पर भीषण प्रहार और पलटवार
युद्ध की आग अब सीधे तौर पर रिहाइशी और रणनीतिक ठिकानों तक पहुँच गई है:
* ईरानी हमला: ईरान ने इजरायल के हरजलिया स्थित एक लग्जरी होटल को निशाना बनाकर उसे तबाह कर दिया। इतना ही नहीं, ईरान ने जॉर्डन, यूएई, कुवैत और बहरीन जैसे देशों पर भी मिसाइलें दागकर युद्ध को बहुपक्षीय बना दिया है।
* इजरायली एयरस्ट्राइक: जवाबी कार्रवाई में इजरायली वायुसेना ने ईरान के कोम और इस्फाहन शहरों पर भारी बमबारी की, जिसमें शुरुआती जानकारी के अनुसार 26 लोगों की मौत हो गई है।
परमाणु केंद्रों पर संकट के बादल
सबसे चिंताजनक खबर ईरान के परमाणु ठिकानों से आ रही है। इजरायल ने ईरान के खोनदाब और यज्द शहरों में स्थित परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया है। परमाणु ठिकानों पर इन हमलों ने पूरी दुनिया को ‘न्यूक्लियर डिजास्टर’ के डर से सहमा दिया है।
बढ़ता तनाव और वैश्विक चिंता
ट्रंप प्रशासन की आक्रामक नीति और ईरान के ‘करो या मरो’ के रुख ने कूटनीति के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं। 10 लाख सैनिकों का जमावड़ा और परमाणु ठिकानों पर बमबारी यह दर्शाती है कि यह संघर्ष अब केवल दो देशों के बीच नहीं, बल्कि एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील हो चुका है।
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