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युद्ध की मार और सरकार का ‘मास्टरस्ट्रोक’: पेट्रोल-डीजल पर ₹10 की भारी कटौती, एक्साइज ड्यूटी घटाकर दी बड़ी राहत

पेट्रोल
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पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार में कोहराम मचा दिया है। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 122 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर चुकी हैं, जिससे भारत में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल की आशंका गहरा गई थी। इस आसन्न संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में ₹10 प्रति लीटर की कटौती करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।

एक्साइज ड्यूटी का नया गणित
सरकार के इस फैसले के बाद टैक्स के ढांचे में बड़ा बदलाव आया है:
* पेट्रोल: विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को ₹13 प्रति लीटर से घटाकर अब मात्र ₹3 प्रति लीटर कर दिया गया है।
* डीजल: डीजल पर लगने वाले ₹10 प्रति लीटर के शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर शून्य (0) कर दिया गया है।
* अफवाहों पर विराम: टैक्स कटौती के साथ ही सरकार ने सोशल मीडिया पर चल रही ‘लॉकडाउन’ की तमाम अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए जनता से शांत रहने की अपील की है।

तेल कंपनियों का घाटा और सरकारी खजाने पर बोझ
पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की हालत पतली हो रही थी। कंपनियों को पेट्रोल पर ₹26 और डीजल पर ₹81.90 प्रति लीटर का घाटा उठाना पड़ रहा था, जिससे दैनिक घाटा ₹2,400 करोड़ तक पहुँच गया था।

हालांकि, इस टैक्स कटौती से आम जनता को तो राहत मिलेगी, लेकिन सरकारी खजाने (Exchequer) को सालाना करीब ₹1.75 लाख करोड़ के राजस्व का नुकसान उठाना होगा। सीबीआईसी (CBIC) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डीजल और एटीएफ (ATF) पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क की हर 15 दिन में समीक्षा की जाएगी।

निर्यात पर लगाम और घरेलू आपूर्ति पर जोर
देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं:
* निर्यात शुल्क (Export Duty): डीजल निर्यात पर ₹21.5 प्रति लीटर और एटीएफ पर ₹29.5 प्रति लीटर का शुल्क लगाया गया है।
* घरेलू बिक्री की अनिवार्यता: अब रिफाइनरियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे अपने कुल पेट्रोल निर्यात का 50% और डीजल निर्यात का 30% हिस्सा घरेलू बाजार में ही बेचें।

आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच भारत से 1.4 करोड़ टन पेट्रोल और 2.36 करोड़ टन डीजल का निर्यात हुआ है। सरकार का ताजा फैसला यह सुनिश्चित करेगा कि वैश्विक युद्ध के बावजूद देश की ऊर्जा सुरक्षा और आम आदमी की जेब पर आंच न आए।

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