भारत में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की सप्लाई को लेकर एक बड़ी चुनौती सामने आ रही है। अप्रैल महीने की शुरुआत से ही देश में LPG की उपलब्धता पर दबाव बढ़ता दिख रहा है। इसका मुख्य कारण घरेलू उत्पादन में गिरावट और आयात (इम्पोर्ट) में आई भारी कमी को माना जा रहा है।
घरेलू उत्पादन में आई गिरावट
ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने की तुलना में भारत के घरेलू LPG उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। ये गिरावट ऐसे समय में आई है जब देश में LPG की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे सप्लाई और मांग के बीच असंतुलन की स्थिति बन रही है।
आयात हुआ लगभग आधा
LPG सप्लाई पर सबसे बड़ा असर आयात में आई गिरावट का पड़ा है। 1 अप्रैल से 14 अप्रैल के बीच भारत ने प्रतिदिन औसतन 37,000 टन LPG का आयात किया, जबकि फरवरी में ये आंकड़ा लगभग 73,000 टन प्रतिदिन था। यानी आयात लगभग आधा रह गया है, जो चिंता का विषय है।
खाड़ी देशों पर निर्भरता बनी बड़ी चुनौती
भारत अभी भी अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है। हालांकि अमेरिका एक बड़े सप्लायर के रूप में उभरा है, फिर भी कुल आयात का आधे से ज्यादा हिस्सा पश्चिम एशिया पर ही निर्भर है। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अस्थिरता के कारण LPG शिपमेंट बाधित हो रही है। यही वजह है कि सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है और आयात घटता जा रहा है।
तुरंत समाधान मुश्किल क्यों?
LPG की वैश्विक सप्लाई का बड़ा हिस्सा पहले से तय लंबे अनुबंधों (Long-term contracts) के तहत होता है। ऐसे में अचानक अतिरिक्त सप्लाई हासिल करना आसान नहीं होता। स्पॉट मार्केट में सीमित उपलब्धता के कारण भारत के लिए तेजी से आयात बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
सप्लाई सामान्य होने में लग सकता है समय
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान हालात जल्द सुधरने वाले नहीं हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रभावित सप्लाई चेन को पूरी तरह बहाल होने में कम से कम तीन साल या उससे अधिक समय लग सकता है। इससे भारत पर आयात लागत और जोखिम दोनों बढ़ने की संभावना है।
बढ़ती आयात निर्भरता चिंता का कारण
भारत अपनी कुल LPG खपत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। फरवरी तक इस आयात का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता था, लेकिन हालिया घटनाओं के बाद यह घटकर करीब 55 प्रतिशत रह गया है। ये बदलाव सप्लाई में रुकावट और वैकल्पिक स्रोतों की खोज दोनों को दर्शाता है।
भारत में LPG सप्लाई की मौजूदा स्थिति कई चुनौतियों की ओर इशारा करती है। घरेलू उत्पादन में कमी, आयात में गिरावट और वैश्विक तनाव के चलते ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव बढ़ रहा है। आने वाले समय में इस संकट से निपटने के लिए सरकार को वैकल्पिक स्रोतों और रणनीतियों पर तेजी से काम करना होगा।
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