महाराष्ट्र

“महाराष्ट्र में काम करना है तो मराठी सीखो!” मंत्री Pratap Sarnaik ने दिया अल्टिमेटम

Pratap Sarnaik
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महाराष्ट्र में परिवहन सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए एक अहम फैसला लिया गया है। राज्य के परिवहन मंत्री Pratap Sarnaik ने स्पष्ट किया है कि जो भी व्यक्ति राज्य में ऑटो, टैक्सी या ऐप-आधारित सेवाओं के जरिए व्यवसाय करना चाहता है, उसे मराठी भाषा का ज्ञान होना जरूरी होगा।

1989 के नियम में संशोधन, अब सख्त पालन

मंत्री के अनुसार, मराठी भाषा से जुड़ा ये नियम कोई नया नहीं है, बल्कि इसे वर्ष 1989 में ही लागू किया गया था। हालांकि, अब इसमें कुछ जरूरी संशोधन किए गए हैं और 1 मई से इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य ये है कि राज्य में सेवाएं देने वाले चालक स्थानीय भाषा को समझें और यात्रियों के साथ बेहतर संवाद कर सकें।

क्यों जरूरी बनाया गया यह नियम?

अधिकारियों का कहना है कि कई बार यात्री मराठी में बात करते हैं, लेकिन ड्राइवर भाषा नहीं समझ पाते, जिससे विवाद की स्थिति बन जाती है। कई मामलों में ये विवाद बढ़कर पुलिस तक पहुंच जाते हैं। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए सरकार ने ये निर्णय लिया है, ताकि संचार की कमी के कारण होने वाले विवादों को रोका जा सके।

15 मई से विशेष अभियान

राज्य परिवहन विभाग 1 मई से 15 अगस्त तक एक विशेष सत्यापन अभियान चलाएगा। इस दौरान ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों की जांच की जाएगी कि वे मराठी भाषा जानते हैं या नहीं। ये अभियान राज्य के सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) में चलाया जाएगा और इसकी निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों की समिति द्वारा की जाएगी।

नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई

मंत्री Pratap Sarnaik ने स्पष्ट किया है कि मराठी न जानने वालों के लाइसेंस तुरंत रद्द नहीं किए जाएंगे, लेकिन नियमों का उल्लंघन करने या अवैध परिवहन गतिविधियों में शामिल पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसका मतलब है कि चालकों को भाषा सीखने का अवसर दिया जाएगा, लेकिन नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

टैक्सी और ऑटो यूनियनों का समर्थन

इस फैसले को टैक्सी और ऑटो यूनियनों का भी समर्थन मिला है। यूनियनों का मानना है कि इससे यात्रियों और चालकों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा और विवाद कम होंगे।

महाराष्ट्र सरकार का यह कदम स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने और सेवा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। ऐसे में जो लोग राज्य में परिवहन सेवाओं के जरिए काम करना चाहते हैं, उनके लिए मराठी सीखना अब न केवल फायदेमंद बल्कि आवश्यक भी हो गया है।

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