कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर हिंसा और तनाव के केंद्र में आ गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (पीए) चंद्रनाथ रथ की बुधवार रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद राज्य की राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
ये वारदात कोलकाता के पास मध्यमग्राम इलाके में हुई, जहां अज्ञात हमलावरों ने चंद्रनाथ रथ पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गंभीर रूप से घायल रथ को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
बीजेपी ने बताया सुनियोजित साजिश
बीजेपी ने इस हत्या को “सुनियोजित राजनीतिक साजिश” करार दिया है। शुभेंदु अधिकारी ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये एक पूर्व नियोजित हमला था और हमलावरों ने घटना से पहले रेकी भी की थी।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और राज्य में राजनीतिक हिंसा लगातार बढ़ रही है। अधिकारी ने इसे “15 साल के जंगलराज” का परिणाम बताया। बीजेपी नेताओं के अनुसार, पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व भी मामले पर नजर बनाए हुए है और पीड़ित परिवार के संपर्क में है।
टीएमसी ने भी की घटना की निंदा
वहीं तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भी इस हत्या की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने बयान जारी कर कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक हिंसा की कोई जगह नहीं है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
टीएमसी ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की बात कही। पार्टी ने ये भी आरोप लगाया कि चुनाव के बाद हिंसा में टीएमसी के कार्यकर्ता भी निशाना बने हैं।
पुलिस जांच में जुटी
पश्चिम बंगाल पुलिस ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। घटनास्थल से कारतूस बरामद किए गए हैं और जिस वाहन का इस्तेमाल किया गया था, उसकी नंबर प्लेट फर्जी पाई गई है।
राज्य के डीजीपी ने कहा कि पुलिस चश्मदीदों के बयान और तकनीकी सबूतों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। फिलहाल हमलावरों की तलाश जारी है।
कौन थे चंद्रनाथ रथ?
41 वर्षीय चंद्रनाथ रथ पूर्व मेदिनीपुर जिले के चांदीपुर के रहने वाले थे। वो लंबे समय से शुभेंदु अधिकारी के बेहद करीबी सहयोगी माने जाते थे और राजनीतिक रणनीति से लेकर संगठनात्मक कार्यों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। राजनीति में आने से पहले चंद्रनाथ रथ भारतीय वायुसेना में करीब दो दशक तक सेवा दे चुके थे। इसके बाद उन्होंने कॉरपोरेट सेक्टर में भी काम किया और फिर सक्रिय राजनीति से जुड़े।
बताया जाता है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी के विस्तार और कई महत्वपूर्ण चुनावी अभियानों में उनकी अहम भूमिका रही थी। पार्टी के अंदर उन्हें एक मजबूत रणनीतिकार के रूप में देखा जाता था।
चुनाव बाद बढ़ी राजनीतिक हिंसा की आशंका
पश्चिम बंगाल में हालिया चुनावों के बाद राजनीतिक हिंसा को लेकर पहले से ही तनाव का माहौल बना हुआ था। विभिन्न इलाकों से तोड़फोड़, हमले और झड़पों की खबरें सामने आ रही थीं। ऐसे समय में चंद्रनाथ रथ की हत्या ने राजनीतिक माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना का असर आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजर पुलिस जांच और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर टिकी हुई है।
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